रांची. विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने सूबेभर में जन आक्रोश रैली कर अपनी सियासी जमीन और जनता का नब्ज टटोलने की कोशिश की. रांची में बुधवार को अंतिम जन आक्रोश रैली का आयोजन हुआ. इसमें बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी आर पी एन सिंह (R. P. N. Singh) ने कहा कि पिछले पांच साल में सूबे में क्या काम हुआ, जनता सब जानती है. जबकि जनता से आशीर्वाद मांगने निकले मुख्यमंत्री विपक्षियों के लिए भद्दी भाषा का इस्तेमाल करते हैं. झारखण्ड में बेरोजगारी बढ़ी है. लेकिन महागठबंधन (Grand Alliance) की सरकार बनती है, तो हर घर के एक सदस्य को नौकरी (Job) दी जाएगी. जिनको नौकरी नहीं, उन्हें बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा.
प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव ने आरोप लगाया कि पांच साल के रघुवर राज में विकास ठप रहा. किसानों का हालत दयनीय है. बेरोजगारी के चलते जनता में आक्रोश है. महागठबंधन की सरकार बनी, तो किसानों का कर्ज माफ होगा. जिस उद्देश्य के लिए जमीन लिया, अगर वह काम 5 साल में नहीं हुआ, तो जमीन वापस किये जाएंगे. खाली पड़े सभी सरकारी पदों को 6 महीने में भरे जाएंगे.
विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने कहा कि 2014 के चुनाव में बीजेपी ने किसानों की आय बढ़ाने का वादा किया था, पर राज्य के किसान आत्महत्या करने को मजबूर हुए. 2014 में बीजेपी ने पारा शिक्षकों को स्थायी करने का वादा किया था, पर पारा शिक्षकों पर लाठियां चलाई गईं. आंगनबाड़ी सेविका- सहायिकाओं पर भी सरकार ने अत्याचार किया. हमारी सरकार बनी, तो पारा शिक्षकों, सेविका-सहायिकाओं की मांगें पूरी की जाएंगी. भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए आक्रोश को जिंदा रखना होगा.
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि झारखण्ड में 20 में से 17 साल तक भाजपा ने राज किया, फिर भी यह विकास में पिछड़ गया. यहां भूख और मॉब लिंचिंग से लोग की मौत हुई. किसान आत्महत्या कर रहे हैं. सीएनटी एक्ट पर हमला किया गया. लेकिन अब झारखण्ड के लोग परिवर्तन चाहते हैं. भूमि अधिग्रहण बिल के माध्यम से आदिवासी-मूलवासी की जमीनें सरकार ने हड़प ली. लेकिन विपक्षी एकता के आगे भाजपा ठीक नहीं पाएगी.



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