रांची। लोकसभा चुनाव में महागठबंधन में शामिल बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा विधानसभा चुनाव में अलग राह पकड़ती दिख रही है। यह बात भी कहीं न कहीं स्पष्ट हो रही है कि मरांडी को हेमंत सोरेन का नेतृत्व स्वीकार नहीं है। दूसरी ओर, हेमंत भी झाविमो को साथ लेकर चलने के मूड में नहीं हैं। सबसे बड़ा खतरा यह है कि झाविमो के विधायक आसानी से भाजपा में चले जाते हैं और इससे विपक्ष कमजोर होता है।

खैर, बुधवार से बिना झाविमो के गठबंधन के स्वरूप पर चर्चा शुरू हुई है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन से मिलने पहुंचे और प्राथमिक तौर पर हेमंत को नेता मानते हुए उन्हें दलों से बातचीत को कहा गया है। वामपंथी पार्टियों से झामुमो बात करेगा और राजद से कांग्रेस। कांग्रेस अब सबको साथ लेकर चलने की जिद को छोड़ती दिख रही है। इस बीच, विपक्षी दलों की बैठकों से झाविमो लगातार अनुपस्थित चल रहा है।
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