देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि फ्रॉड बैंकिंग में हो या फिर किसी अन्य सेक्टर में हो. इन सभी बड़े स्तर के फ्रॉड को लेकर अलर्ट नहीं होना चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि ऐसे फ्रॉड को रोकने के लिए रेग्युलेटर्स (नियामक) को तीसरी आंख से नजर रखनी पड़ेगी. जेटली ने कहा कि भारत में केवल नेताओं को जवाबदेह माना जा रहा है, रेग्युलेटर्स को नहीं.
वित्त मंत्री अंग्रेजी के बिजनेस अखबार इकनॉमिक टाइम्स की ओर से आयोजित ग्लोबल बिजनेस समिट में बोल रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा, अगर किसी बैंक की विभिन्न ब्रांचों में फ्रॉर्ड हो रहा था और किसी भी कर्मचारी ने इसे नहीं पकड़ा, ऑडिर्टस ने भी मुंह फेरे रखा या फिर लापरवाही से काम किया और मैनेजमेंट भी अनजान बना रहा, तो यह देश के लिए चिंता की बात है.
कारोबारियों को नैतिक कारोबार आदत डालनी होगी
जेटली ने कहा कि कारोबारियों को नैतिक कारोबार की आदत डालने की जरूरत है क्योंकि इस तरह के घोटाले अर्थव्यवस्था पर धब्बा हैं और ये सुधारों एवं कारोबार सुगमता को पीछे धकेल देते हैं. उन्होंने कहा कि कर्जदाता-कर्जदार के संबंधों में अनैतिक व्यवहार का खत्म होना जरूरी है. उन्होंने कहा, यदि जरूरत पड़ी तो संलिप्त व्यक्तियों को सजा देने के लिए नियमों को सख्त किया जाएगा. वित्तमंत्री ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर पाने को लेकर बैंक प्रबंधन की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि बैंक में क्या चल रहा है इससे शीर्ष प्रबंधन की अनभिज्ञता और अपर्याप्त निगरानी चिंताजनक है.
जीएसटी और नोटबंदी जैसे कदमों से देश को होगा फायदा
वित्त मंत्री ने नोटबंदी और जीएसटी जैसे कदमों की तारीफ की. उन्होंने कहा कि नोटबंदी से हम कैशलेस इकॉनमी की तरफ बढ़े हैं. जेटली ने कहा कि जीएसटी का फायदा अभी आंशिक रूप से ही मिल पाया है. सरकार कदम उठा रही है. जीएसटी से देश के राजस्व को तेजी से बढ़ाने में मदद मिलेगी.
वित्त मंत्री ने इसी हफ्ते पहली बार पीएनबी घोटाले पर बोलते हुए कहा था कि घोटाले के किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने बैंक के प्रबंधन सवाल उठाए थे.



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