एक करोड़ से अधिक के इनामी और शीर्ष माओवादी नेता देवकुमार सिंह उर्फ अरविंदजी की मौत की पुष्टि हो गई. माओवादियों ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर शीर्ष माओवादी नेता की मौत की जानकारी मीडिया को उपलब्ध कराई है. अब आधिकारिक तौर पर अरविंदजी की मौत हो गई है, ऐसे में अरविंदजी की मौत से संगठन और माओवादी आंदोलन पर कितना बड़ा प्रभाव पड़ेगा और नक्सलियों के खिलाफ अभियान चला रही राज्य पुलिस को कितना फायदा मिल पाएगा. यह एक बड़ा प्रश्न है.

हाल के वर्षों में बढ़े पुलिसिया अभियान और स्पिंटर ग्रुप के साथ संघर्ष के कारण कमजोर पड़े माओवादी आंदोलन को शीर्ष नेता अरविंदजी की मौत से गहरा झटका लगा है. पुलिसिया दबिश के बीच भी अरिवंदजी की उपस्थिति ने न सिर्फ संगठन को एकजुट रखा बल्कि पुलिस और दूसरे संगठनों के लिए सिरदर्द बना रहा. जानकारों की माने तो किसी भी संगठन के एक छोटे कार्यकर्ता के मरने से असर पड़ता है. अरविंदजी तो माओवादी आंदोलन के एक बड़े नेता थे. ऐसे में संगठन और आंदोलन पर असर पड़ना लाजमी है.

राज्य पुलिस के वरीय अधिकारी भी इस बात को स्वीकार करने से गुरेज नहीं करते हैं कि अरविंद जी का संगठन और उससे जुड़े लोगों पर गहरा प्रभाव था. ऐसे में अरविंदजी की मौत से संगठन में बिखराव आएगा और कमजोर पड़ेगा. हालांकि अधिकारियों की माने तो राज्य पुलिस इस बिखराव का इंतजार नहीं करेगी. माओवादियों के खिलाफ अभियान पूर्व की तरह आगे भी जारी रहेगा.

बहरहाल अब देखना दिलचस्प होगा कि तमाम प्रयासों के बाद भी अरविंद जी को जिंदा पकड़ने या मार गिराने की बात तो दूर मरने के बाद भी अरविंदजी के शव तक नहीं पहुंच पाने वाली राज्य पुलिस अरविंदजी की मौत से कमजोर हुए माओवाद पर कितना लगाम लगा पाती है. वहीं दूसरी ओर माओवादी अपने नेता के जुझारूपन का हथियार बना कर संगठन को कितना मजबूत कर पाते हैं.
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