प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को इस बात पर अफसोस जताया कि बहुत से लोगों ने बाबा साहब भीमराव आम्बेडकर का मजाक उड़ाया और एक पिछड़े परिवार के बेटे को आगे बढ़ने से रोकने के लिए उनके रास्ते में तमाम तरह की बाधाएं खड़ी की गयीं.लेकिन प्रधानमंत्री ने साथ ही कहा कि आज का भारत पूरी तरह एक अलग भारत है क्योंकि यह भारत गरीब और पिछड़े का भारत है.

आकाशवाणी पर आने वाले कार्यक्रम मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी ने महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री ,राम मनोहर लोहिया, चरण सिंह और देवी लाल जैसे नेताओं की भूमिका की भी सराहना की जिन्होंने राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलुओं में कृषि और किसान के महत्व को समझा था.

प्रधानमंत्री ने कहा, 'अम्बेडकर ने हमें यह दिखाया था कि सफल होने के लिए यह जरूरी नहीं कि एक व्यक्ति संपन्न और धनी मानी परिवार में ही पैदा हो बल्कि भारत में गरीब परिवारों में जन्म लेने वाले भी सपने देख सकते हैं और सफलता हासिल करते हुए उन सपनों को पूरा करने की हिम्मत रखते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह स्वयं अम्बेडकर के दर्शन का उदाहरण हैं.


उन्होंने कहा 'बहुत से लोगों ने अम्बेडकर का मजाक उड़ाया और उन्हें पीछे धकेलने की कोशिश की. हर संभव प्रयास किए गए कि एक गरीब और पिछड़े परिवार का बेटा जिंदगी में तरक्की न कर सके. जिंदगी में सफल न हो सके और कहीं कुछ बन न जाए.लेकिन नए भारत की तस्वीर इससे एकदम अलग है. यह वह भारत है जो अम्बेडकर का भारत है, गरीब का भारत है, पिछड़े का भारत है.'

उन्होंने कहा कि डॉ अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर 14 अप्रैल से 5 मई तक ‘ग्राम-स्वराज अभियान’ आयोजित किया जा रहा है. इसके तहत पूरे भारत में ग्राम-विकास, ग़रीब-कल्याण और सामाजिक-न्याय पर अलग-अलग कार्यक्रम होंगे.

उन्होंने कहा, बाबा साहब का आत्मनिर्भरता में पूरा विश्वास था. वे नहीं चाहते थे कि कोई व्यक्ति हमेशा ग़रीबी में अपना जीवन जीता रहे. बाबा साहब अम्बेडकर के विजन को आगे बढ़ाते हुए स्मार्ट सिटी मिशन, अर्बन मिशन की शुरुआत की गई ताकि बड़े नगरों, छोटे शहरों में हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके.

मोदी ने कहा कि उद्योगों का विकास शहरों में ही संभव होगा यही सोच थी जिसके कारण डॉ० बाबा साहब अम्बेडकर ने भारत के शहरीकरण पर भरोसा किया.




उन्होंने महात्मा गांधी के शब्दों को याद किया जिन्होंने कहा था 'अगर हमने धरती से नाता तोड़ लिया तो समझो खुद से भी नाता टूट गया.' साथ ही प्रधानमंत्री ने चरण सिंह के 1979 में दिए गए एक भाषण को भी याद किया जिसमें उन्होंने किसानों से नयी तकनीक अपनाने की अपील करते हुए उसके महत्व को बताया था.
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