गुमला जिला मुख्यालय से 80 किमी की दूरी पर प्राकृतिक वादियों के बीच में डुमरी प्रखंड में स्थित प्रसिद्ध बाबा टांगीनाथ धाम इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. सरकार इस मंदिर के महत्व को और अधिक बढ़ाने का काम कर रही है. इस मंदिर परिसर में भव्य त्रिशुल है जो फिलहाल कई भागों में बट गया है. जिसे मंदिर परिसर में ही स्थापित किया गया है. इस त्रिशुल के बारे में कहा जाता है कि ये भगवान शिव का त्रिशुल है.

पूरे देश में केवल यहां भगवान शिव के रूप में चंदन के वृक्ष की पूजा होती है. प्राचीन मान्यता है कि इस चंदन वृक्ष में भगवान शिव समा गये थे. जिसके बाद से इसकी पूजा होती आ रही है. इसके साथ ही इस परिसर की खुदाई में काफी प्राचीन मूर्तियां भी मिली हैं. इन मूर्तियों की कलाकृति लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करती है.

स्थानीय लोगों की माने तो इस मंदिर की स्थिति कुछ वर्षों पहले तक काफी दयनीय बनी हुई थी. मंदिर का मुख्य हिस्सा पूरी तरह से खंडहर हो चुका था. जिसके कारण मंदिर में काफी कम श्रद्धालु आते थे. सीएम रघुबर दास की पहल से अब पूरे मंदिर को काफी आकर्षक तरीके से बाहर से आए कारीगरों द्वारा जीर्णोद्धार करवाया गया है.

जिला योजना पदाधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि पूर्व की सरकारों ने इतने प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए गंभीरता नहीं दिखाई. मुख्यमंत्री रघुबर दास ने इस मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए सरकारी खजाना को पूरी तरह खोल दिया.



उन्होंने बताया कि करोड़ों रुपया खर्च करके मंदिर के मुख्य परिसर को पहले दुरुस्थ किया गया. उन्होंने बताया कि सीएम रघुबर दास के निर्देशानुसार मंदिर के आस-पास पर्यटकीय सुविधा बहाल करने की दिशा में काम किया जा रहा है. जोकि कुछ दिनों में पूरा हो जाएगा.
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