झारखंड से मानव तस्करी कोई नई बात नहीं है. लेकिन मानव तस्करी का जो नया रूप सामने आया है वो न सिर्फ चौंकाने वाला है बल्कि काफी खतरनाक भी है. प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीएलएफआई ने अब मानव तस्करों के साथ गठजोड़ कर मानव तस्करी का नया खेल शुरू कर दिया है.

मासूम बच्चे बच्चियों पर मानव तस्करों की नजर है. इसके लिए मानव तस्करों को नक्सलियों का साथ मिल गया है. हाल के दिनों में खूंटी, सिमडेगा, गुमला जैसे जिलों से गायब बच्चों की जब पड़ताल की गई तो ये खुलासा हुआ कि प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीएलएफआई के सरंक्षण में इनका अपहरण किया गया. हालांकि नक्सली पहले भी बच्चों को उठाते रहे हैं. लेकिन वो संगठन में शामिल करने के लिए. लेकिन इस बार जो बातें सामने आई हैं वो सीधे तौर पर नक्सली मानव तस्करों के बीच गठजोड़ का मामला है. मानव तस्कर नक्सलियों के संरक्षण में अब झारखंड की बेटियों को बाजार में बेच रहे हैं. बदले में नक्सली नेताओं को बड़े शहरों में शेल्टर और पैसे मिल रहे हैं.

मानव तस्करी पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता बैद्यनाथ ने कहा कि झारखंड में मानव तस्कर और पीएलएफआई के बीच गठजोड़ हो गया है. दोनों एक दूसरे के पूरक हो गए हैं. इस कारण लड़कियों की तस्करी ज्यादा बढ़ गई है. गांव में नक्सली बच्चियों के गार्जियन को धमकाते हैं. तस्कर लड़कियों को ले जाते हैं. मानव तस्करों को नक्सलियों का संरक्षण मिलने लगा है.

राज्य पुलिस मुख्यालय भी इस बात से अनजान नहीं है कि नक्सलियों के संरक्षण में मानव तस्करी का खेल चल रहा है. वरीय अधिकारियों की माने तो यह एक खतरनाक ट्रेंड सामने आया है. हालांकि राज्य पुलिस के अधिकारी इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और तस्करी के लिए ले जाए गए बच्चों को छुड़ाने की बात करते हैं. झारखंड पुलिस के आईजी आशीष बत्रा ने कहा कि एक दो केस में ऐसा पता चला है. पीएलएफआई द्वारा कुछ भोलेभाले नवयुवक और नवयुवतियों को बहला फुसलाकर कर अपने साथ में लाने का प्रयास किया जा रहा है. कुछ लोगों को काम कराने के लिए बाहर ले जाया जा रहा है. इन लोगों का लिंक प्रकाश में आया था. इस पर अनुसंधान किया जा रहा है.


वहीं झारखंड पुलिस में एडीजी सह पुलिस प्रवक्ता आरके मल्लिक ने पूरी स्थिति को दुखद बताते हुए कहा कि पुलिस की इस पर निगाह है और कार्रवाई की जा रही है. मालूम हो कि झारखंड मानव तस्करी का एक बड़ा केंद्र रहा है. यहां से गरीब बच्चे बच्चियों को तस्करी के माध्यम से महानगरों से लेकर विदेशों तक बेचा जाता रहा है. जहां इन बच्चों को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है.

राज्य पुलिस ने इस पर रोक लगाने को लेकर ऑपरेशन मुस्कान, हमतुम जैसे अभियान चला कर तस्करी के शिकार बच्चों के रेस्क्यू से लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है. वहीं एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की स्थापना कर मानव तस्करों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू की गई और सफलता मिलनी भी शुरू हो गई थी. लेकिन मानव तस्करी के इस नए ट्रेंड ने पुलिसिया रणनीति पर नए सिरे से विचार करने को मजबूर कर दिया है.
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