झारखंड में मैट्रिक परीक्षा के नतीजे पिछले साल के मुकाबले रिजल्ट खराब हुए हैं. वर्ष 2017 में 67.83 फीसदी बच्चों ने मैट्रिक परीक्षा में सफलता पाई थी, लेकिन इस बार यह आंकड़ा मात्र 59.48 प्रतिशत रहा. यानी झारखंड में लगातार मैट्रिक के रिजल्ट में गिरावट जारी है.

पिछले पांच साल का आंकड़ा देंखे तो मैट्रिक परीक्षा परिणाम का ग्राफ लगातार गिरता रहा है. मैट्रिक में सबसे बेहतर परिणाम 2008 में रहा था. जाहिर है गिरते रिजल्ट पर जैक चेयरमैन ने साफ शब्दों में कहा कि उनका काम सिर्फ परीक्षा लेना है.



हालांकि संतोष करने वाली बात यह है कि झारखंड के इतिहास में पहली बार 1,00120 छात्र प्रथम श्रेणी में पास हुए. सेकेंड डिविजन में पास होने वाले छात्रों की संख्या 1,18046 रहा. जबकि तृतीय श्रेणी में पास होने वाले छात्रों की संख्या 35,764 है. जैक ने फिलहाल टॉपरों की घोषणा नहीं की है.

झारखंड एकेडमिक काउंसिल(जैक) के चेयरमैन डॉ अरविन्द प्रसाद सिंह ने अपने कार्यकाल का अंतिम परीक्षा परिणाम जारी किया. इस बार मैट्रिक में कुल 4,28,389 छात्र शामिल हुए थे, जिसमें से 2,54830 छात्र सफल हुए. सफल परीक्षार्थियों का प्रतिशत 59.48 प्रतिशत रहा. परीक्षा में जहां लड़कों के पास होने का प्रतिशत 61.79 प्रतिशत रहा, वहीं लड़कियों के पास होने का प्रतिशत 57. 29 प्रतिशत रहा.



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