गिरिडीह भूख से मौत मामले पर अपर समाहर्ता ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि सावित्री देवी की मौत भूख से नहीं हुई. कुछ दिनों पहले रिम्स में सावित्री देवी का इलाज हुआ था. डॉक्टरों ने उन्हें parenchymal haematoma नामक बीमारी बताई थी.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि सावित्री देवी के देवर भोलाराम महतो और उनका आंगन एक ही है. वो न केवल सावित्री देवी की देखभाल कर रहे थे बल्कि उन्हें खाना भी खिला रहे थे. सावित्री देवी के खाते में अप्रैल महीने में पेंशन की राशि 1800 रु ट्रांसफर की गई थी. अब भी उनके खाते में 2375 रुपये जमा हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक सावित्री देवी की तबियत ठीक नहीं थी. इसलिए गांव के लोग लगातार सावित्री देवी से सम्पर्क में थे और गांव की कई औरतें उनकी सेवा कर रहीं थीं और खाना भी खिला रही थीं. हालांकि प्रशासन की इस रिपोर्ट को मृतक महिला के बेटे ने सिरे से खारिज कर दिया. उसका दावा है कि उसकी मां की मौत भूख से ही हुई.
बता दें कि गिरिडीह के डुमरी प्रखंड के मगरगद्दी गांव में गत शनिवार को सावित्री देवी की मौत हो गई. परिवार व गांववालों का कहना है कि उसकी भूख से मौत हुई. पति द्वारका महतो की 10 साल पहले मौत हो गई. महिला के दो बेटे हैं, जो कुछ दिनों पहले ही मजदूरी करने बाहर गए थे. मां की मौत की सूचना मिलते ही छोटा बेटा रविवार को गांव पहुंचा.



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