रामगढ़ I झारखंड के रामगढ़ जिले में भूख से मौत मामले में जिला प्रशासन की नींद उड़ गई है. इसी क्रम में बीते शनिवार को जिला प्रशासन के एसी, एसडीओ, बीडीओ और सीओ समेत तमाम अधिकारी कुंदरिया बस्ती पहुंचे. इस दौरान रांची से राइट टू फूड कैंपेन संस्था के लोग भी पहुंचे. मृतक चिंतामन के पुत्र से जब राइट टू फूड कैंपेन संस्था के लोगों ने पूछताछ की तो उसमें एक चौका देने वाली बात सामने आई. मृतक के पुत्र ने बताया कि उनसे प्रशासन के लोगोंं ने एक कोरे कागज पर अंगूठा का छाप लगवा लिया था. उसमें क्या लिखा था उन्हें कुछ मालूम नहीं है. वहीं जब जिला प्रशासन के लोग बस्ती में पहुंचे तो बस्ती के लोग जिला प्रशासन के रैवये से नाराज और आक्रोशित हो गए. इस दौरान ग्रामीणों का विरोध देख प्रशासन के लोग वहां से उल्टे पांव भाग खड़े हुए.

मृतक के बेटे का कहना है कि आखिर प्रशासन उसकी आवाज को क्यों दबाने में लगी है. उसने जिला प्रशासन पूछा है कि अगर भूख से मौत नहीं हुई है तो क्यों नहीं जिला प्रशासन ने शव का पोस्टमार्टम कराया. वहीं इस मुद्दे पर बोलते हुए एडिशनल कलेक्टर ने अपने उपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. एडिशनल कलेक्टर विजय गुप्ता का कहना है कि व्यक्ति की मौत घर के छप्पर से गिरने से हुई है.

वहीं राइट टू फूड की मेंबर स्वाति नारायण ने कहा कि यहां की स्थिति काफी भयावह है. उन्होंने झारखंड के सिमडेगा में भूख से संतोषी की हुई मौत के मुद्दे को भी उठाया था, लेकिन सरकार का दावा था कि अंतिम से अंतिम व्यक्ति तक राशन कार्ड दिया जाएगा. हालांकि यहां किसी के भी पास राशन कार्ड नहीं है.

बता दें गिरिडीह, चतरा के बाद अब रामगढ़ में भूख से मौत का मामला सामने आया है. मांडू प्रखण्ड के कुंदरिया बस्ती के 40 वर्षीय चिंतामन मल्हार की कथित तौर पर भूख से मौत हुई. गुरुवार को मौत की खबर मिलते ही अंचलाधिकारी गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार को 15 किलो चावल, आलू और नगद 5 हजार रुपए दिए. इससे पहले गिरिडीह और चतरा में भूख से मौत का मामला सामने आया था, लेकिन प्रशासन की जांच रिपोर्ट में इसे भूख से मौत नहीं माना गया, जबकि बीमारी को मौत का कारण बता दिया गया.
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