रांची झारखंड की राजधानी रांची में भूमि अधिग्रहण बिल को राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी मिलने के बाद राज्य की सियासत गर्म हो गई है. विपक्ष इसका पुरजोर विरोध कर रहा है. वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का तर्क है कि यह विधेयक सरकारी प्रयोजन के तहत भूमि अधिग्रहण के लिए है, जिसे विपक्ष नहीं समझता है.

मामले में बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी विकास की राजनीति करती है. बीजेपी किसी भी काम को करने से पहले किसी तरह का कोई नफा नुकसान नहीं देखती है. उन्होंने कहा कि यह भूमि अधिग्रहण बिल वापस झारखंड लौटा है. इसकी उन्हें आधिकारिक सूचना पार्टी के स्तर पर नहीं मिली है, लेकिन इसमें सबसे निंदनीय बात यह है कि विपक्ष पूरे मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है.

बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि इस बार जो अमेंडमेंट राज्य सरकार ने भेजा था उसमें सिर्फ और सिर्फ सरकारी भवन, नहर, आंगनबाड़ी केंद्र, शहर में सड़कों की चौड़ीकरण और विद्यालयों के लिए भूमि अर्जन करने के लिए समय सीमा घटाई गई थी. उन्होंने कहा कि विपक्ष इस पूरे मुद्दे को इस तरह से पेश कर रहा है कि ये किसी प्राइवेट सेक्टर के दिए जाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ये जो प्रपोज्ड अमेंडमेंट्स हैं ये सिर्फ और सिर्फ सरकारी प्रयोजन के लिए है. साथ ही इसमें ग्राम सभा से परामर्श को रखा गया है. इसी के साथ उन्होंने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि विपक्ष को हर चीज में राजनीति नहीं करनी चाहिए.
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