पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच नहीं रहे. इससे पहले झारखंड में भी उनकी सलामती के लिए मंदिरों और मस्जिदों में मत्था टेका जा रहा था. इन सबके बीच झारखंडवासी उनके उस सौगात को याद कर रहे हैं, जो उन्होंने आज से 18 साल पहले यानी 2000 में दी थी. ये वाजपेयी सरकार की ही देन है कि 15 नवम्बर 2000 को बिहार से कटकर झारखंड अलग राज्य बना. उसी के साथ करीब 70 साल पुरानी झारखंडवासियों की मांग पूरी हुई थी.
2 अगस्त 2000 को इससे संबंधित बिल संसद में पारित हुआ. उसी साल 15 नवम्बर को झारखंड देश के 28वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया. झारखंड के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और उतराखंड का भी नये राज्य के रूप में जन्म हुआ. दरअसल, अटल बिहारी वाजपेयी छोटे राज्यों के पक्षधर रहे हैं.
साल 1930 में आदिवासी महासभा ने जयपाल सिंह मुंडा की अगुवाई में अगल झारखंड राज्य का सपना देखा था. उसके बाद इसको लेकर समय-समय पर आंदोलन किया जाता रहा. 70 साल बाद जयपाल सिंह मुंडा का वो सपना अटल सरकार ने पूरा किया. आज जबकि पूर्व प्रधानमंत्री हमारे बीच नहीं रहे, तो झारखंड की जनता नम आंखों से उनके उस सौगात को याद कर रही है. हर जुबां से अपने प्रिय पूर्व प्रधानमंत्री की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना है.



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