एक ओर  झारखण्ड में बीजेपी नित सरकार विकास की गति तेज होते विपक्ष घबड़ा गयी है । वही साफ सुथरी बेदाग सरकार से घबड़ाकर विपक्ष कोई भी कदम उठाने को तैयार है ।आज महत्वपूर्ण विषय झारखण्ड के पारा शिक्षक का ,एक ओर जहां झारखण्ड की स्थापना दिवस और भगवान विरसा मुंडा जयंती  राज्य मना रही थी ,वही दूसरे तरफ महागठबंधन शिक्षक समुदाय को भड़का कर उग्र कर रही थी । और भगवान विरसा की धरती को कलंकित करने को विपक्ष उतारू था।
दूरी तरफ महागठबंधन  के कथित नेता प्रसासन को ललकार कर और भीड़ को ललकार कर उग्र कर रही थी
वही पारा टीचर अपने कड़ी मेहनत कर दो जून के रोटी (अपने हक़ की कमाई ,)और परिवार के भरण पोषण के उचित न्याय हेतु श्रधेय मुख्यमंत्री से अपनी मांग को दुहरा रहे थे ,सरकार उनके कुछ माँगो पर विचार भी कर रही है
परन्तु विपक्ष नही चाहती कि सरकार और पारा शिक्षक में समन्वय बने इस कारण आंदोलन को उग्र करने का प्रयास किया जबकि राज्य के ज्वलन्त मुद्दे पर विपक्ष को सर्वसमति बनाने चाहिए था ।शिक्षको का मुद्दा आज का नही है अगर पारा शिक्षकों के ऊपर विपक्ष को सहानुभूति होती तो मधु कोड़ा जी शिबू सोरेन जी  हेमन्त सोरेन जी आने कार्यकाल में उनलोग के साथ न्याय  क्यों नही किये जबकि आज जो पारा शिक्षक हैं वो मात्र भाजपा की ही देन है
  और   जांच का विषय है कि इस पवित्र मोके पर आंदोलन को उग्र करने में किसका हाथ है या प्रसासन भी उग्र कैसे हुई  
परन्तु दुखद बात है कि झारखण्ड स्थापना दिवस और भगवान विरसा मुंडा के जयंती पर राज्य जीत में काला बिल्ला लगाना और आंदोलन करना कहि से तर्क संगत नही जो विपक्ष का  चेहरा सामने आई जनता देख रही है।
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