प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को मंडल डैम का शिलान्यास करने वाले हैं. इससे झारखंड के 19 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिल पाएगी. फिलहाल मात्र 6 हजार हेक्टेयर भूमि में ही सिंचाई हो पा रही है. जबकि बिहार के 50 हजार हेक्टेयर खेती को पानी मिल रहा है.

दरअसल डैम में पड़ने वाले नौ गेटों का निर्माण नहीं हो पाने के कारण रबी और खरीफ फसल को पर्याप्त सिंचाई नहीं मिल पाती है. हालांकि इस परियोजना के तहत आने वाले मोहम्मदगंज बराज का काम पूरा हो चुका है. लेफ्ट कनाल का भी काम करीब 90 फीसदी तक हो गया है. राइट कनाल का भी काम पूरा हो चुका है.

मंडल डैम परियोजना के लिए 1007. 29 हेक्टेयर वन भूमि का स्टेज-2 क्लीयरेंस होना है. इसके लिए 24 शर्तें रखी गयी हैं. जिन्हें पूरा किया जा रहा है. इसके तहत पलामू टाइगर रिजर्व के आठ गांवों को हटाया जाना है. इसके लिए प्रति परिवार को 15 लाख रुपये बतौर मुआवजा दिया जाएगा. इस पर करीब 117 करोड़ रुपये खर्च होंगे.

साल 1972 में संयुक्त बिहार के समय 30 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना की शुरुआत हुई थी. इससे पलाम, गढ़वा और औरंगाबाद को पानी मिलना है. यह परियोजना 1993 में लगभग पूरी हो गयी थी. लेकिन वन विभाग की आपत्ति के कारण पेंच फंस गया. डैम के लिए गेट का निर्माण नहीं होने के कारण पानी रूक नहीं रहा था. गेट निर्माण के लिए वन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र चाहिए था, जो पलामू टाइगर रिजर्व एरिया में पड़ता था. इसलिए करीब 20 साल तक परियोजना का काम रुका रहा.
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