पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया प्रखंड की जमुना टूडु को पर्यावरण संरक्षण व महिला सशक्तीकरण के लिए बेहतरीन कार्य के लिए पद्मश्री से सम्मानित होने की घोषणा हुई हैं. वह लेडी टार्जन के नाम से जानी जाती हैं. पद्मश्री से सम्मानित होने की खबर सुनकर पूरे बहरागोडा विधानसभा क्षेत्र के लोगों में खुशी है. जमुना टुडू को लेडी टार्जन के नाम से भी जाना जाता है. जंगल बचाने वाली जमुना टुडू हरियाली बचाने के लिए जान भी इस काम में दांव लगा देती हैं और गांव-गांव जा कर महिलाओं को जंगल बचाने के लिये प्रेरित करती है. महिलाओं को बताया और समझाया जाता है कि जंगल बचने से जीवन बचेगा.

ओडिसा की रहने वाली जमुना टूडू की शादी 1998 में चाकुलिया के मुटूरखाम एक छोटे से गांव में हुई थी. शादी के बाद जमुना मुटूरखाम में रहने लगी. जमुना टुडू ने मुटूरखाम के जंगल को देखा तो बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे थे. गांव की महिलाएं भी जंगल से लकड़ी काट कर लाती थी. पहली बार जमुना भी जंगल लकड़ी काटने गयी थी, जिसस पर उन्होंने सोचा की इसी तरह अगर जंगल काट कर लकड़ी लाने का काम करती रही तो एक दिन जंगल ही खत्म हो जायेगा. जमुना टुडू ने जंगल को बचाने का फैसला लिया और शुरूआत में चार-पांच महिलाओं के साथ जंगल बचाने की जंग छेड़ दी.

शुरूआत में जमुना टुडू को कई तरह के गालियां, धमकियां मिलती थी, लेकिन जमुना ने हार नही मानी और जंगल बचाने का फैसला अडिंग रखा. इसके साथ ही जमुना ने गांव-गांव की महिलाओं को एक साथ जोड़ना शुरू किया और घर-घर जाकर महिलाओं को जागृत कर एक समिति बनायी, जिसमें वे खुद अध्यक्ष बनीं. मुटूरखान में सबसे पहले उन्होंने जंगल बचाने का काम शुरू किया था और आज महिलाओं के बल पर ही मुटूरखान में करीबन 50 हैक्टर जंगल की रक्षा की है.

जमुना टुडू धीरे- धीरे मुटूरखान गांव से अब पंचायत, प्रखंड और पूर्वी सिंहभूम में अब करीबन 300 से अधिक महिला समूह बना कर जंगल की रक्षा कर रही हैं.  जमुना टुडू ने कहा कि इसमें गांव की महिलाओं का बड़ा योगदान है. आज भी वे गांव- गांव जा कर महिलाओं को जंगल बचाने के लिये प्रेरित करती है.

जमुना टुडू को पद्मश्री से सम्मान किए जाने पर उन्होंने कहा कि कभी नहीं सोचा था कि वे कभी पद्मश्री से सम्मानित होगी. उन्होंने कहा कि बस वे अपना काम करती रही. जंगल बचाने के लिए उन्होंने महिलाओं के साथ पेड़ पर राखी बांध कर रक्षा करने का संकल्प लिया. पेड़ को भाई और पौधो को बच्चों की तरह वे रक्षा करती हैं. जमुना टुडू ने कहा कि जब तक वे जीवित रहेगी, जब तक सांसे रहेगी तब तक वे जंगल बचाने का अभियान जारी रखेंगी.
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