आगामी लोकसभा चुनाव में झारखंड के गोड्डा सीट पर महागठबंधन की जीत लगभग तय है। महागठबंधन के फॉर्मूले में सबसे ज्यादा किचकिच गोड्डा सीट को लेकर ही थी। मगर इसके पीछे जीत का वो आंकलन था, जिसने कांग्रेस और जेवीएम, दोनों ही दलों को गोड्डा के ग़दर में कूदने की होड़ में शामिल कर दिया था। आखिर में यह सीट अब जेवीएम के खाते में जाने की खबर है। और अब यहां से जेवीएम विधायक प्रदीप यादव की स्पष्ट जीत का अनुमान लग रहा है। 

2009 का चुनाव परिणाम :

गोड्डा में 2009 के चुनाव परिणाम ने सबको चौका दिया। अब तक गोड्डा में फुरकान अंसारी और प्रदीप यादव का मुकाबला होता था। इस चुनाव में भी दोनों थे, लेकिन प्रदीप यादव की पार्टी बदल गई थी, वे जेवीएम (झारखंड विकास मोर्चा) से उम्मीदवार थे। मुकाबला कांटे का हुआ। तीन उम्मीदवारों ने लगभग बराबर मत लाए और एक प्रतिशत से कम मतों से भाजपा प्रत्याशी निशिकांत दुबे चुनाव जीत गए। निशिकांत दुबे (भाजपा) को 189526, फुरकान अंसारी (कांग्रेस) को 183119 और प्रदीप यादव (जेवीएम) को 176926 मत मिले।

कांटे के मुकाबले देखने को मिले :

वहीं, 2014 में परिस्थितियां यही रही, लेकिन निशिकांत दुबे ने जीत का अंतर चौड़ा कर लिया और लगभग 60 हजार मतों से जीते। निशिकांत दुबे 380500, फुरकान अंसारी319818 और प्रदीप यादव-193506 मत लाए। पिछले दो चुनाव से सबक ले महागठबंधन की मशक्कत जारी है। ऐसे में संभव है की कांटे के मुकाबले देखने को मिले और परिणाम बड़े उलटफेर के साथ सामने आए।
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