लोकसभा चुनाव का शंखनाद होते ही राजनीतिक पार्टियां जीत का गणित बैठाने में जुट गयी हैं. पार्टियां प्रत्याशियों के चयन में भी नफा- नुकसान देख रही हैं. यही वजह है कि रांची लोकसभा क्षेत्र में भी प्रत्याशियों को लेकर कयासों का बाजार गर्म है. बात भाजपा सांसद रामटहल चौधरी की हो या फिर कांग्रेस के पूर्व सांसद सुबोधकांत सहाय की, टिकट अभी तय नहीं हुए हैं. विकल्प के रूप में नये चेहरे ढूंढे जा रहे हैं.

भाजपा के रामटहल चौधरी और कांग्रेस के सुबोधकांत सहाय के बीच रांची लोकसभा सीट पर कई बार मुकाबला हो चुका है. लेकिन इस बार कांग्रेस- भाजपा में सीधी लड़ाई होने के बाद भी दोनों नेता आमने- सामने होंगे, इसको लेकर संशय की स्थिति है. राजनीतिक जानकार एवं कोल्हान यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति आरपीपी सिंह का कहना है कि इस बार दोनों पार्टियां नये चेहरे की तलाश कर रही हैं, ताकि जनता को नया विकल्प दिया जा सके.

वरिष्ठ पत्रकार मधुकर की माने तो नये चेहरे की तलाश में जुटी भाजपा मंत्री सीपी सिंह, प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश और आदित्य साहू को विकल्प के रूप में देख रही है. वहीं कांग्रेस में जेपी गुप्ता या प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार, सुबोधकांत सहाय का विकल्प बन सकते हैं. हालांकि जानकार यह भी मानते हैं कि इन चेहरों में माद्दा नहीं दिखता, जितना सुबोधकांत सहाय और रामटहल चौधरी में है. ऐसे मे चेहरा बदलने की कोशिश पार्टियों को महंगी भी पड़ सकती है.

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