झारखंड में गरीबी और अशिक्षा की वजह से बाल श्रम लगातार बढ़ रहा है. 'सेव द चिल्ड्रेन' संस्था की मानें तो झारखंड में करीब 4 लाख से ज्यादा बच्चे बाल श्रमिक के रूप में काम काम कर रहे हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. आए दिन सैकड़ों की संख्या में बच्चों को कभी रेलवे स्टेशन पर से कहीं ले जाते हुए रोक कर पुलिस कब्जे में लेती है तो कभी दूसरे राज्यों में ईंट भट्ठों से यहां के बच्चों को मुक्त कराया जाता है. इस पर रोक लगाने में सरकार और सिस्टम फेल साबित हो रहे हैं.
रांची में बाल कल्याण समिति के सदस्य श्रीकांत ने कहा कि हर साल हजारों बच्चें झारखंड राज्य से बाहर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने जा रहे हैं. इसके पीछे बड़ी वजह गरीबी है. गांवों में ज्यादातर परिवार अपने बच्चों के साथ रोजगार के नाम पर पलायन कर रहे हैं. गांवों के बच्चे सबसे ज्यादा बाल श्रम में जा रहे हैं. परदेस में जाकर पूरे परिवार मजदूरी में लग जाते हैं.
सेव द चिल्ड्रेन संस्था के जीएम स्टेट प्रोग्राम महादेव हांसदा का कहना है कि एक बच्चा जब राज्य से बाहर काम करने के लिए जाता है तो वह अगली बार जब वापस आता है तो अपने साथ 4 से 5 बच्चों को रोजगार के नाम पर अपने साथ ले जाता है. यह समस्या राज्य के लिए गंभीर बनती जा रही है. इसलिए सभी को गांवों पर ज्यादा ध्यान देने की और परिवारों को जागरूक करने की जरूरत है. वहीं इन परिवारों में बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है.



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