झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) सु्प्रीमो शिबू सोरेन के पीएस रहे शशिनाथ झा की हत्या के मामले में नया मोड़ आया है. दरअसल जिस शव को सीबीआई ने शशिनाथ झा का शव बताया था. उस शव का नया दावेदार सामने आया है. मो. हबीबुल्लाह नामक शख्स ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उस शव को अपने भाई का शव होने का दावा किया है.
हाइकोर्ट के न्यायाधीश अमिताभ कुमार गुप्ता की अदालत में इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई. इस दौरान दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सीबीआई को जवाब पेश करने को कहा है. कोर्ट ने सीबीआई को कहा है कि अगर लाश का अंतिम संस्कार नहीं गया है, तो उसे सुरक्षित रखा जाए. तब तक जब तक इस मामले की सुनवाई पूरी न हो जाए.
प्रार्थी हबीबुल्लाह ने याचिका के माध्यम से अदालत को बताया कि 1998 में लाश के पास से बरामद हुए कपड़े और सामान उनके भाई के थे. इसी आधार पर वह शुरू से शव पर अपना दावा ठोक रहा है. बतौर प्राथी लेकिन उन्हें कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ. लिहाजा उन्हें हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है. हबीबुल्लाह ने याचिका में अंतिम संस्कार के लिए शव को सौंपे जाने की मांग की है.
हबीबुल्लाह के मुताबिक उसका भाई अलीम अंसारी लापता चल रहा है. अभी तक न तो वह मिला है और न ही उसकी लाश मिली है. उन्होंने मामले की जांच की मांग की है और कहा कि अब तो अदालत भी मान चुकी है कि वह शव शशिनाथ झा का नहीं है. उधर, सीबीआई के द्वारा रांची के पिस्का बागान से बरामद शव के बारे में फॉरेंसिक रिपोर्ट भी स्पष्ट नहीं कर सकी कि वह शशिनाथ झा का शव है या किसी और का. इस मामले में अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी.
बता दें कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने शिबू सोरेन को अपने निजी सचिव शशि नाथ झा की हत्या के मामले में बरी कर दिया. सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में दिल्ली हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. दिल्ली हाइकोर्ट ने शिबू सोरेन को हत्याकांड में दोषी करार देने के निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया था. 1994 में दिल्ली से शशिनाथ झा को अगवा कर लिया गया था.



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