कोयला खादानों की वजह से धनबाद को कोयलांचल के नाम से भी जाना जाता है. वहीं, धनबाद जिले में ऐतिहासिक झरिया शहर के उजड़ने का खतरा मंडराने लगा है. बारिश के दौरान भूमिगत आग और भू-धंसान का खतरा बताते हुए भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने झरिया बाजार के मुख्य इलाके और कोलियरी क्षेत्र में विस्थापितों को डैंजर इलाका खाली करने की नोटिस चिपकाया है, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत और आक्रोश व्याप्त हो गया है.

कतरास मोड पर कोल इंडिया चेयरमैन और बीसीसीएल सीएमडी का पुतला जलाने के साथ ही जन प्रतिनिधियों के खिलाफ रोष जता रहे हैं. लोगों का आरोप है कि झरिया में भूमिगत खदान बंद हो गए हैं. उसके जगह नए आउटसोर्सिंग ओपेन कास्ट माइंस खुल रहे है. चूंकि झरिया के जमीन के अंदर प्राईम कोकिंग मौजूद है. ऐसे में कोयले के लिए बीसीसीएल को जमीन की आवश्यकता है. इसलिए बीसीसीएल लोगों को भू-धंसान का खतरा दिखा खाली करना चाहती है.

गौरतलब है कि देश की सबसे बड़ी पुनर्वास योजना में शुमार झरिया विस्थापितों के लिए झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार बनाई गई. धनबाद की बेलगड़िया में एक बड़ा टाउनशिप तैयार की गई. लेकिन अभी तक मात्र तीन हजार परिवार को ही सुरक्षित पुनर्वास हो पाया है. साल 2009 में झरिया मास्टर प्लान बनी थी. तब करीब 7 हजार करोड़ की राशि खर्च कर 12 सालों में 53 हजार परिवारों को पुनर्वासित करने का लक्ष्य था. लेकिन अब राशि डबल होने के साथ विस्थापितों का आंकड़ा करीब 1 लाख तक पहुंच गया है.

मामले को तूल पकड़ता देख बीसीसीएल बस्ताकोला प्रबंधन ने पूरे मामले में चुप्पी साध लिया है. जिला प्रशासन और जेआरडीए ने बीसीसीएल के नोटिस पर खुद नोटिस लेते हुए झरिया को फिलहाल खाली कराने की बात से इंकार किया है. लेकिन सर्वे पूरा होने के बाद करीब एक लाख विस्थापित परिवार के सुरक्षित पुनर्वास की बात स्वीकार किया है. मतलब साफ है आज नहीं तो कल झरिया को उजड़ने का खतरा बरकरार है.
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