आज 23 जून को भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष,प्रखर राष्ट्रवाद के प्रणेता,महान शिक्षाविद अमर शहीद डॉ●श्यामा प्रसाद मुखर्जी का 66 वां पुण्यतिथि है। जिसे भारतीय जनता पार्टी प्रतिवर्ष पूरे देश में बलिदान दिवस के रूप में मनाया करती है।
       आज डॉ●श्यामा प्रसाद मुखर्जी विचार मंच के तत्वाधान में पाकुड़ नगर के डॉ●मुखर्जी मार्केट(टीन बांग्ला)पाकुड़ में बलिदान दिवस पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, कार्यक्रम का संचालन भाजपा नेता हिसाबी राय ने किया। उक्त कार्यक्रम में पाकुड़ नगर के भाजपा कार्यकर्ताओं सहित पाकुड़ के गणमान्य लोगों ने भाग लिया। जिसमें प्रमुख रुप से  भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य श्री अनुग्रहित प्रसाद साह,नगर परिषद के अध्यक्ष श्रीमती सम्पा साह,उपाध्यक्ष श्री सुनील कुमार सिन्हा,जिला 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के उपाध्यक्ष श्री विवेकानंद तिवारी,सदस्य श्री हिसाबी राय,जिला परिषद के उपाध्यक्ष श्री मुकेश कुमार शुक्ला,श्री दुर्गा मंराडी,श्री बलराम दुबे,श्रीमती शर्मिला रजक सहित सभी कार्यकर्ताओं ने डॉ● मुखर्जी के आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।अमर शहीद डॉ● मुखर्जी के सहादत को देश कभी भूल नहीं सकता है।डॉ●मुखर्जी जैसे महान भारत के सपूत अनमोल रत्न को देश ने खो दिया है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता है।
      आज के श्रद्धांजलि सभा मे भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य श्री अनुग्राहित प्रसाद साह ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री पं● जवाहरलाल नेहरू के गलत नीतियों के कारण ही आज भी कश्मीर की समस्या बनी हुई है जिसका प्रतिदिन देश भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना रहे एवं देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए डॉ● मुखर्जी ने जोरदार संघर्ष किया। उन्होंने घोषणा किया कि एक देश में दो निशान,दो प्रधान एवं दो संविधान हम चलने नहीं देंगे और इस घोषणा के साथ पूरे देश में प्रखर आंदोलन खड़ा किया।कश्मीर के बीजा की व्यवस्था को तोड़ते हुए वे कश्मीर की सीमा में प्रवेश कर गए। 11मई 1953 को परमिट सिस्टम को तोड़कर कश्मीर में प्रवेश करने के जुर्म में तत्कालीन सदरे रियासत शेख अब्दुल्ला ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। श्रीनगर के जेल में डॉ● मुखर्जी को यातनाओं से गुजरना पड़ा धीरे-धीरे उनके स्वास्थ्य में गिरावट आने लगा।उचित इलाज की व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं हो कराया गया। दिनांक 22 जून को न्यायालय में मुकदमे का बहस हुआ और 23 जून को न्यायालय के फैसले फैसला आना था,लेकिन अचानक उसी दिन डा●मुखर्जी के निधन के समाचार से पूरा देश स्तब्ध हो गया। उनकी मृत्यु निसंदेह संदेहास्पद अवस्था में हुई मृत्यु के कारणों का आज तक पता नहीं चल सका। देश की एकता और अखंडता के डॉ● मुखर्जी अपने 52 वर्ष के अल्पायु में ही भारत माता के चरणों में अपने को अर्पित कर दिया।
    निश्चित रूप से आज का दिन हम देशवासियों के लिए दुर्भाग्य का दिन है। काश वह हमारे बीच कुछ दिन और जीवित होते तो भारत देश का स्वरूप कुछ और होता।भले ही डॉ● मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक रहे फिर भी हम उन्हें दलीय सीमा में बांधकर नहीं रख सकते हैं क्योंकि उनका चिंतन और संघर्ष राष्ट्र निर्माण और मानव कल्याण के लिए हुआ करता था। आज हम अमर शहीद डॉ●श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शत शत नमन करते हैं उनके जीवन से सीख लेने का संकल्प लेते हैं।
     आज के कार्यक्रम में मनीष कुमार पाण्डेय,मनजीत रजक, संजय कुमार शुक्ला, प्रो●अमरेंद्र कुमार सिन्हा, मंजूर आलम,विष्णु कुमार, धर्मेंद्र कुमार साह,सादेकुल आलम,श्यामल कुमार गोस्वामी,सीखा देवी,राजेश डोकानियाँ,पूर्व वार्ड पार्षद बेला मजूमदार,सोहन मंडल,रवि जयसवाल,वार्ड पार्षद अरुण सरदार,राणा ओझा,अजय रविदास,पार्वती देवी,प्राची चौधरी,प्रवीण मंडल,मोहन मंडल,मानिक ठाकुर, मुस्ताक अंसारी,मोनू तिवारी,दिलीप सिंह,सन्नी तिर्थानी, साधना ओझा,शंभू भगत इत्यादि उपस्थित थे।

Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours