उपस्थित कवियों ने काव्‍य-पाठ कर लोकार्पण समारोह को उत्सव में किया तब्दील

भागलपुर : हिंदी और आंगिका के लोकप्रिय कवि रथेंद्र बिष्णु नन्हें की हिंदी कविताओं का संग्रह "समय की पुकार हूं मैं" का लोकार्पण आदमपुर स्थित एस.एम.एस स्कूल के प्रांगण में संपन्न हुआ। लोकार्पण समारोह की अध्‍यक्षता देश के चर्चित साहित्‍यकार शिव कुमार शिव ने की वहीं संचालन गीतकार राजकुमार व अंगिका संघर्षकारी गौतम सुमन की।समारोह में मुख्‍य अतिथि की हैंसियत से जहां टीएमबीयू हिन्‍दी विभाग के सेवानिवृत प्राचार्य प्रॊ. रामचन्‍द्र घोष,स्‍वागताध्‍यक्ष के रुप में एसएमएस स्‍कूल के निदेशक कौशल किशोर सिंह मंचासीन थे वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में कथाकार रंजन,डॉ. रामनंदन विकल, कवि रथेंद्र बिष्णु नन्हें, राहुल शिवाय एवं श्रीमती रेखा विष्णु नन्हें ने मंच पर शिरकत की। सर्वप्रथम  मंचासीन अतिथियों ने संयुक्त रूप से  दीप प्रज्वलित कर  कार्यक्रम का आगाज कर कवि रथेन्‍द्र द्‍वारा रचित काव्‍य संग्रह" समय की पुकार हूँ मैं" पुस्तक का लोकार्पण किया।तत्पश्चात लोकार्पित पुस्तक पर वक्तव्य देते हुए कौशल किशोर सिंह ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है।उन्‍होंने कहा कि  अंग क्षेत्र की धरा पर आज भी साहित्य, सभ्यता और संस्कृति की त्रिवेणी बहती है। उन्होंने  खुशी प्रकट करते हुए  कहा कि अंग क्षेत्र में जिस तरह लगातार तेजी से साहित्य सृजन का कार्य हो रहा है, इससे दुनिया के लिए अंग क्षेत्र साहित्य का सबसे बड़ा पाठशाला बनेगा, ऐसा उनका विश्वास है।दिनेश बाबा तपन ने इस पुस्तक कि रचनाओं को सराहा और कहा कि रथेन्‍द्र  जी की यह पुस्तक उनके साहित्य प्रेम को दर्शाता है। वहीं हिन्‍दी-अंगिका के  चर्चित  साहित्यकार  सह लोकभाषा अंगिका को समुचित सम्मान व अधिकार दिलाने की दिशा में निरंतर कलम चलाने वाले कलमकार डॉ अमरेंद्र ने पुस्तक के शीर्षक पर विस्तार से चर्चा की साथ ही उन्‍होंने कवि रथेन्द्र के बारे में बताते हुए कहा कि वे एक सफल पुलिस प्रशासक ही नहीं एक अच्छे साहित्‍य साधक भी रहे हैं,यह पुस्‍तक इस बात को प्रमाणित करता है। डॉ. रामनंदन विकल ने कहा इस पुस्तक के लेखक ने यह साबित कर दिया है कि किसी भी क्षेत्र में लोग कार्यरत हों पर वह चाहे तो साहित्य सृजन का कार्य कर सकते हैं। कथाकार शिव कुमार शिव ने कहा कि मैंने पहले भी कहा है किस साहित्य समाज को केवल दिशा नहीं देता है बल्कि इंसान को जीने की कला भी सिखाता है। साहित्य ही एक ऐसी कला है जिसमें कलमकार हमेशा अमर रहता है। उन्होंने खुशी प्रकट करते हुए कहा पुस्तक देखकर उन्हें यकीन नहीं होता है की पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होकर कोई इतना बेहतरीन साहित्य सृजन का कारी भी कर सकता है, ऐसा वही कर सकता है  जो सदैव  साहित्य में  जीता आया हो।भोजपुरी-अंगिका व हिन्‍दी में मजबूत पकड़ रखने वाले डॉ. प्रेमचंद पांडे ने कहा कि सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी श्री रथेंद्र ने इस बात को प्रमाणित कर दिखाया है कि पुलिस वाले भी साहित्य साधना में लिप्त रहते हैं। एक कवि में कैसे धीरे-धीरे गंभीरता आती है यह इस पुस्तक में देखने को मिलता है। वहीं  कविता कोश के सहायक निदेशक राहुल शिवाय ने विस्तार से बताया कि कवि नन्हे से कैसे मुलाकात हुई, उनके अनुसार जब तक कोई पाठक नहीं हो सकता, तब तक वह सफल लेखक नहीं हो सकता है। उन्होंने बताया कि नन्हे जी को वे एक अच्छे पाठक के रूप में जानता था लेकिन नन्हे जी एक बहुत अच्छे लेखक भी हैं इसे  पिछले कुछ दिन पहले से जान पाया हूं। मौके पर मौजूद  अंग उत्थान आंदोलन समिति  बिहार झारखंड के  केंद्रीय अध्यक्ष  साह  अंगिका के लिए  निरंतर संघर्षरत गौतम सुमन ने कहा अंग क्षेत्र की माटी का यह प्रभाव है कि यह हर किसी को साहित्य पूजा और साहित्य साधना में लिप्त कर उसे साहित्यकार व कवि बनने पर मजबूर कर देती है।
अंत में पुस्तक के लेखक सह कवि रथेंद्र विष्णु नन्हे ने कहा कि साहित्य ने उसे जीना सिखाया है। उन्होंने कहा कि बचपन से ही उनका झुकाव रंगमंच और साहित्य की तरफ रहा है। उन्होंने बताया कि पुलिस सेवा में रहकर भी वे अंग की माटी और साहित्य की खुशबू को कभी भुला नहीं पाए। यही कारण है कि पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद अपनी बचपन की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए उन्होंने पुनः साहित्य सृजन करते रहने का संकल्प ले लिया है, इस संकल्प को उन्होंने ताउम्र निभाने का वचन भी दिया। अंत में उपस्थित कवियों ने काव्‍य पाठ के माध्यम से इस लोकार्पण समारोह को उत्सव में तब्दील कर दिया।      
इस अवसर पर श्रीमती रेखा विष्णु, संजीव कुमार मिश्र, लक्ष्मी नारायण मधुलक्ष्मी, त्रिलोकीनाथ दिवाकर, डॉ. नवीन निकुंज, महेंद्र मयंक, प्रीतम विश्वकर्मा कवियाठ, धीरज पंडित, माधवी चौधरी, नीरज कुमार सिन्हा, आलोक प्रेमी, सच्चिदानंद साह के साथ अनेकों कवि-साहित्यकार मौजूद थे।



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