रांची। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लोहरदगा की धरती से अपने चुनाव अभियान का आगाज करते हुए पिछड़ा वर्ग का आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने का वादा कर बड़ा दांव चल गए। राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले शाह ने अपने इस दांव से विपक्ष के साथ-साथ कभी एनडीए के सहयोगी रहे आजसू को भी तगड़ा झटका दिया है। आजसू पिछड़ा वर्ग का आरक्षण बढ़ाने का मुद्दा शुरू से उठाती रही है।
अमित शाह को इस बात का बखूबी एहसास है कि यह मुद्दा झारखंड के लिए कितना प्रभावी हो सकता है। यही वजह रही कि उन्होंने सिर्फ सतही तौर पर इसका जिक्र नहीं किया, बल्कि यह भी बताया कि भाजपा इसे लागू करने के लिए क्या कदम उठाएगी। घोषणापत्र के एजेंडा मेें पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को शामिल करने और सरकार गठन के बाद बकायदा कमेटी का गठन कर इस दिशा में पहल करने का शाह ने भरोसा दिलाया।
स्पष्ट है कि भाजपा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बाद अब पिछड़े वर्ग में पैठ बढ़ाने की गंभीर कोशिशों में जुट गई है। अमित शाह ने अपने संबोधन के दौरान पूरी तरह से कांग्रेस को निशाने पर रखा। सिर्फ एक बार झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन का नाम लेते हुए उन पर तंज कसा। कभी सहयोगी रहे आजसू पर टिप्पणी से दूरी बनाई। स्पष्ट संकेत हैं कि आगे भी भाजपा के निशाने पर यूपीए गठबंधन ही रहेगा। आजसू के साथ संभावनाओं के द्वार खुले हुए हैं।



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