राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी की योगी सरकार को एड्स के बढ़ते मामले पर नोटिस जारी किया है. कैदियों में बढ़ते एड्स के मामले को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी के मुख्य सचिव और जेल के आईजी को नोटिस जारी करते हुए वृस्त्रित रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने सरकार से कहा है कि मामले में 6 दिन के अंदर रिपोर्ट दाखिल करें और यह भी बताएं कि सरकार ने इसकी रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए हैं.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि इस संबंध में, अगर मीडिया खबर सही है, तो उत्तर प्रदेश की जेलों की बदहाली के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है. कैदियों में एचआईवी संक्रमण कैसे फैला, इसकी वजह का पता लगाने के लिए तत्काल जांच की आवश्यकता है. इसके साथ ही एहतियात के तौर पर तत्काल उपाय भी जरूरी है. जिससे अन्य कैदी एचआईवी से संक्रमित न होने पाएं. संक्रमित कैदियों को आवश्यक चिकित्सकीय उपचार मुहैया कराई जाए.

28 फरवरी को आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जेल प्रशासन ने दावा किया है कि बीमारी जेल के भीतर नहीं फैली, कैदी जब जेल में आए थे, तभी संक्रमण के शिकार थे. उनमें से अधिकांश मादक पदार्थों से जुड़े कानून के तहत जेल की सजा पाए थे. पिछले साल अक्टूबर में उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी की पहल पर एचआईवी का पता लगाने के लिए कैदिया का ब्लड टेस्ट कराया गया था. जिसमें 22 कैदियों के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी.

बता दें, गोरखपुर जिला जेल में 22 कैदियों के एचआईवी पॉजिटिव मिलने से जेल प्रशासन और कैदियों में हड़कंप मच गया था. आईजी जेल के निर्देश पर जिला कारागार गोरखपुर में 1500 कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया था. जिसमें 22 कैदियों के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी. जेल में बंद विचाराधीन कैदियों में ही सबसे ज्यादा एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे.


मामला सामने आने के बाद डीआईजी जेल यादवेंद्र शुक्ला ने बताया कि अभियान चलाकर कैदियों का स्वास्थ्य परिक्षण कराया गया था. जिसमें 1500 कैदियों में 22 बंदी एचआईवी पॉजिटिव निकले हैं. उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा एचआईवी पॉजिटिव विचाराधीन कैदियों में पाया गया है. कुछ सजायफ्ता कैदी भी हैं. लेकिन ज्यादातर विचाराधीन इस कड़ी में है. इसके रोकथाम के लिए सारे कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा.
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