झारखंड में नौकरशाह रिटायरमेंट के बाद फिर से नौकरी करने की जद्दोजहद में लगे रहे हैं. इसके लिए नौकरी के अंतिम चरण में सत्ता के साथ ताल से ताल मिलाने में लगे रहते हैं और सरकार इसका पुरस्कार भी देती रही है.
झारखंड में किसी के अच्छे दिन हों या ना हों, नौकरशाहों के लिए यह राज्य काफी अच्छा रहा है. यहां के आईएएस अधिकारियों को शासन के साथ मिलजुल कर रहने में अच्छा लगता है. रघुवर सरकार में भी अधिकारियों के ऊपर सख्ती की बातें जरूर होती हैं, लेकिन अधिकारी सरकार को पसंद भी आते हैं. रिटायरमेंट के बाद कोई सरकारी ओहदा मिल जाए, इसके लिए तमाम हथकंडे अपनाए जाते हैं. यही कारण है कि रिटायरमेंट के आते-आते जुगाड़ लगाना शुरू कर देते हैं. राज्य में ऐसे कई अधिकारी हैं, जिन्हें रिटायरमेंट के बाद सरकार ने पद दिया है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं चाईबासा से सांसद लक्ष्मण गिलुआ कहते हैं कि इस सिस्टम पर रोक लगनी चाहिए.
रघुवरल सरकार में हाल में रिटायर हुए अधिकारियों को अच्छे पद देने की चर्चा तेज है. चाहे वे राजभवन में रहे हों या फिर सरकार के मुख्य पद पर. जानकार मानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद अधिकांश अधिकारी रांची में ही अपना आशियाना बनाए रखने के लिए परेशान रहते हैं. इसलिए सत्तारुढ़ दल के नेताओं
से लेकर सरकार के मुखिया तक समीकरण फिट करने में लगे रहते हैं . कोई राजनीतिक दल ज्वाइन कर लेता तो कोई बोर्ड, आयोग या निगम में प्रमुख पद पाने में लगा रहता है. सरकार उन्हें अवार्ड देती भी है .सरकार के मंत्री सी पी सिंह कहते हैं कि सरकार अपनी जरूरत के हिसाब से काम करती है.
रघुवर सरकार में भी इस संस्कृति को देखा जा रहा है. वैसे पूर्व की सरकार में भी कुछेक उदाहरण रहे हैं . लेकिन यह प्रवृत्ति नौकरशाही की निष्पक्षता पर ग्रहण जरूर लगाता है.



Post A Comment:
0 comments so far,add yours