नियोजन नीति को लेकर उठे विवाद के बाद झारखंड में नौकरियों के लिए हुई आधा दर्जन परीक्षाओं के रिजल्ट लटके हुए हैं. सरकार नीति बनाने में तेजी दिखाती है मगर अमल कराने के समय सरकारी व्यवस्था सुस्त पड़ जाती है.ऐसे में नौकरी की आस में रात-दिन किताबों पर आंख गड़ाए युवा बेरोजगारों का क्या होगा, इसे देखने- सुनने वाला कोई नहीं हैं. राजधानी रांची के सेंट्रल लाइब्रेरी में हर दिन सैकड़ों छात्र दिनभर प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए आते हैं. परीक्षाओं के परिणाम लटके रहने से लंबे समय से यहां सरकारी नौकरी की आस में ग्रुप में पढ़ाई करने वाले इन छात्रों की मनोदशा अब बिगड़ने लगी है.
सरकारी नौकरी की चाहत में कोई जेपीएससी की तैयारी में लगा हुआ है तो कोई शिक्षक तो कोई दारोगा बनने की चाहत रखे हुए है, मगर सरकार की उदासीन रवैया ने इनके परिश्रम पर पानी फेर दिया है.
हुई परीक्षाओं के लटके हुए परिणाम
1. जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2016
2. हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया,17572 पद
3. संयुक्त पुलिस अवर निरीक्षक-3019 पद
4. स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक-3080 पद
5. इंटरस्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-3244 पद
6. इंडिया रिजर्व बटालियन-1426 पद
दरअसल नियोजन नीति को लेकर उठे विवाद के कारण राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में होने वाली करीब 25 हजार नियुक्तियों पर ग्रहण लगा हुआ है. राज्य सरकार ने दो महीने पहले मंत्री अमर बाउरी के नेतृत्व में एक कमेटी बनाकर इसकी समीक्षा शुरू की मगर उसका भी फलाफल अब तक नहीं आया है.
मंत्री अमर बाउरी की मानें तो अब अप्रैल में यह कमेटी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. जाहिर है कि रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार उसकी समीक्षा करने के बाद निर्णय लेगी.
स्थानीयता और नियोजन नीति के मुद्दे पर छात्र संगठन सरकार के विरोध में आंदोलन करते रहे हैं.
शिड्युल 13 जिलों की तरह अन्य 11 जिलों को भी स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित करने की मांग पर विचार चल रहा है.
इन सबके बीच सबकी निगाहें अमर बाउरी के नेतृत्व में बनी हाईलेवल कमेटी पर टिकी हुई है कि आखिरकार कमिटी क्या निर्णय लेती है. मगर इतना तो जरूर है कि सरकारी स्तर पर इस विवाद को सुलझाने में हो रही देरी ने छात्रों के भविष्य को अधर में ला दिया है.



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