झारखंड पुलिस ने सीआरपीएफ के साथ मिलकर नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू कर दी है. गिरिडीह, बोकारो सीमा और जमुई से सटे इलाके में माओवादियों के खिलाफ इस साल का सबसे बड़ा ऑपरेशन 'चार्ली' की सफलता इसका गवाह है. दो दिनों तक चले इस अभियान में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. संयुक्त अभियान में एक सैक मेम्बर और दो सब जोनल कमांडर समेत 15 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया. नक्सलियों के कई कैम्प ध्वस्त कर भारी मात्रा में हथियार, गोला बारूद,
नक्सली साहित्य समेत कई सामान भी बरामद किए गए.

झारखंड पुलिस ने वर्ष 2017 में नक्सल मुक्त झारखंड बनाने को लेकर अभियान शुरू किया था. इस अभियान को काफी अच्छी सफलता मिली और कई इलाके से नक्सलियों को खदेड़ भगाया गया. लेकिन पारसनाथ पहाड़ी, झुमरा पहाड़ और बिहार के जमुई से सटे इलाके में माओवादियों की धमक बाकी थी.

इन इलाकों को खाली कराने के लिए पुलिस ने एक विशेष रणनीति के तहत सीआरपीएफ के साथ एक संयुक्त अभियान 'चार्ली' शुरू किया. अभियान का लक्ष्य इलाके में सक्रिय पांच लाख का इनामी सबजोनल कमांडर चार्ली और उसके दस्ते को खत्म करना था. लेकिन पुलिस को अभियान में लक्ष्य से बड़ी सफलता मिली. सब जोनल कमांडर चार्ली तो पुलिस के हत्थे चढ़ा ही, साथ ही बिहार झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी का सदस्य और 25 लाख का इनामी नक्सली सुनिल मांझी, पांच लाख का इनामी सब जोनल कमांडर सोहन भुईयां समेत कुल 15 नक्सली पकड़े गए. पुलिस ने लूटे हुए हथियार सहित भारी मात्रा में गोला बारूद, केन बम, पांच किमी लम्बी कोडेक्स वॉयर समेत कई सामान बरामद किए.

राज्य पुलिस के प्रवक्ता आरके मल्लिक की माने तो यह पुलिस की बड़ी सफलता है. ऑपरेशन चार्ली की सफलता से उत्साहित राज्य पुलिस के अधिकारी नक्सलियों से ऑपरेशन नई दिशा के तहत हथियार
छोड़ कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील कर रहे है. हथियार नहीं छोड़ने पर मार गिराने या फिर गिरफ्तार करने की चेतावनी भी दे रहे हैं.

इस संयुक्त अभियान में शामिल सीआरपीएफ के अधिकारी अभियान की सफलता के पीछे सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के साथ बेहतर समन्वय को कारण मानते हैं. सीआरपीएफ के आईजी संजय लाटकर की माने तो जिस तरीके से अभियान चलाया जा रहा है और अभियान को सफलता मिल रही है, सूबे से नक्सलवाद का जल्द सफाया हो जाएगा.
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