रांची झारखंड की राजधानी रांची में कुरमी-कुड़मी जनजाति झारखंड में रघुवर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए अपनी मांगों को लेकर अब सड़क पर उतरकर आंदोलन की बात कह रही है. इतना ही नहीं कुर्मी जनजाति ने सरकार के दोहरे मापदंड का हवाला देते हुए आगामी 23 अप्रैल को झारखंड बंद का आह्वान किया है.

कुरमी-कुड़मी विकास मोर्चा का कहना है कि राज्य में रघुवर सरकार जहां उन्हें सीएनटी के दायरे में रखे हुए है, तो वहीं केंद्र को बताती है कि ये जाति सुखी सम्पन्न है. मामले में कुरमी-कुड़मी विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष शीतल ओहदार ने कहा कि सरकार अगर उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं रखती तो आने वाले चुनाव में वो सत्ताधारी दल को आईना दिखाने का काम करेंगे.

उन्होंने कहा कि बुधवार को कुरमी-कुड़मी विकास मोर्चा की ओर से एक दिवसीय बैठक बुलाई गई थी. पिछले दिनों कुरमी समाज की ओर से रांची के मोरहाबादी मैदान में कुरमी महारैली का आयोजन किया गया था. महारैली की माध्यम से कुरमी-कुड़मी महतो जाति को अनुसूचित जनजाति के सूची में शामिल करने को लेकर राज्य की रघुवर सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम दिया गया था.

उन्होंने कहा कि एक महीना बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई पहल नहीं की गई है. इसलिए समाज की ओर से आगामी 22 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने के बाद अगले दिन 23 अप्रैल को कुरमी जाति सड़क पर उतरेंगे झारखंड बंद को सफल बनाएंगे.
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