झारखंड में मैट्रिक और इंटर परीक्षा के परिणाम पर ग्रहण लगता दिख रहा है. इस ग्रहण की वजह है सूबे की पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा का वह आदेश जिसमें कहा गया कि मैट्रिक और इंटर परीक्षा की कॉपी सिर्फ सरकारी शिक्षक ही जाचेंगे.

पहले 16 अप्रैल से कॉपियों की जांच शुरू होनी थी, लेकिन पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के आदेश का पेंच इसमें फंस गया है. लिहाजा मैट्रिक और इंटर परीक्षा की लगभग 40 लाख काॉपियों की जांच
कैसे हो इस पर मंथन जारी है.

झारखंड एकेडमिक कॉउंसिल (जैक) के अध्यक्ष डॉ. अरविन्द प्रसाद कहते हैं कि यदि पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा का आदेश मान लिया जाये, तो कॉपियों की जांच छह माह में भी पूरा नहीं होगा.



मैट्रिक में चार लाख और इंटर की परीक्षा में लगभग साढे तीन लाख परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी. एक परीक्षार्थी की कॉपियों की संख्या छह है. इस लिहाज से देखें तो मैट्रिक और इंटर की कुल कॉपियों की संख्या चालीस लाख के आसपास होती है. उधर हर सरकारी स्कूलों में सभी विषय के शिक्षक भी नहीं हैं.

माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव सुरेन्द्र झा का कहना है कि ऐसी सूचना है कि जैक ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्थापना अनुमति प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को भी मूल्यांकन कार्य में लगाने का फैसला लिया है. उन्होंने जैक के इस निर्णय का स्वागत किया है.

जैक की कोशिश है कि जून के पहले सप्ताह में मैट्रिक और इंटर साइंस परीक्षा का परिणाम घोषित हो जाए.
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