राज्य सरकार के अधिकारी मुख्यमंत्री की उम्मीदों पर पानी फेर दे रहे हैं. कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को रोजगार देने की कोशिश पर ग्रहण लगा है. दिखावे के लिए अधिकारियों ने युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंप दिए. लेकिन काम नहीं मिला. युवाओं को सरकार से इसे अधिक पारदर्शी बनाने की अपेक्षा की जा रही है.
झारखंड सरकार ने पिछले 12 जनवरी को एक बड़ा काम करने का दावा किया. स्किल समिट में 25 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए. अफसरों ने अपनी वाहवाही लूटने के लिए यह आंकड़ा बड़ा कर दिया ताकि मुख्यमंत्री खुश हो जाएं. खेलगांव में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ. पूरे तामझाम के साथ नियुक्ति पत्र दिया गया. विभिन्न शिक्षण संस्थानों से ट्रेंड युवाओं में से 10,650 लोगों को नौकरी मिल पाई. वेतन या स्टाइपेंड भी अपेक्षा से कम मिला. ऐसे में झारखंड के युवाओं को बड़ा झटका लगा है. वे कहते हैं कि सरकार को इसे प्रोत्साहित करने के लिए कई काम करने चाहिए.
राज्य में कौशल विकास मिशन के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य है. सरकार के मुखिया रघुवर दास का इस मिशन पर बड़ा जोर है. लेकिन अधिकारी अपने हिसाब से काम करते हैं. एक बार फिर सरकार ने इस कार्यक्रम को करने की रुपरेखा बनाई है. अगले साल 12 जनवरी तक 1 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य है. इसकी शुरुआत 15 जुलाई को चाईबासा से होगी. अधिकारी मानते हैं कि 12 जनवरी को दिए गए 25 हजार से अधिक नियुक्ति पत्र में से साढ़े दस हजार को ही सही मायने में रोजगार मिला. उसमें भी स्टाईपेंड या वेतन सात हजार से लेकर 12 हजार रुपये पाने वाले अधिक हैं.
राज्य के युवाओं को यह शंका है कि कौशल विकास के महत्वपूर्ण लक्ष्य को सरकार के अधिकारी गड़बड़ा नहीं दें. इसलिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया जा रहा है कि इस पर विशेष ध्यान दिया जाए. साथ ही पारदर्शिता भी जरूरी है.



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