राज्य सरकार द्वारा शुरू किया गया 'ऑपरेशन नई दिशा' एक ओर जहां नक्सलियों को जीवन की नई दिशा दे रहा है वहीं दूसरी ओर राज्य पुलिस के लिए भी नक्सल उन्मूलन अभियान में एक बड़ा हथियार साबित हो रहा है. इस विशेष अभियान ने अब तक लगभग दो सौ नक्सलियों की जीवन की दिशा बदल दी और वे जंगलों की खाक छानने के बजाए अब समाज की मुख्यधारा में शामिल हो जिंदगी की नई शुरुआत कर चुके हैं. राज्य पुलिस नक्सलियों के इस आत्मसमर्पण नीति से उत्साहित हो कर इस नीति को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है.
शनिवार को शीर्ष नक्सली नेता अरविंदजी और सुधाकरण का विश्वस्त सहयोगी और कोयलशंख जोन का कमांडर प्रकाश उरांव उर्फ दीपक उरांव ने ऑपरेशन नई दिशा के तहत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गया. दीपक पहला उग्रवादी नहीं है जिसने आत्मसमर्पण नीति के तहत आत्मसमर्पण किया है.
इससे पहले कुख्यात कुंदन पाहन, बच्चों को नक्सली बनाने वाला नकुल यादव, बड़ा विकास, डिम्बा पाहन जैसे लगभग दो सौ नक्सलियों ने पिछले कुछ वर्षों में न सिर्फ आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए हैं बल्कि उनकी निशानदेही पर राज्य पुलिस को अभियान में बड़ी सफलता भी मिली है. कई बड़े नक्सलियों की गिरफ्तारी के साथ हथियारों और विस्फोटकों का जखीरा भी बरामद हुआ है. योजना की सफलता से उत्साहित राज्य पुलिस ने सरकार को एक नई आत्मसमर्पण नीति का प्रस्ताव भेजा है जिसमें वर्तमान की तुलना में ज्यादा सुविधा देने की बात कही गई है.
वरीय पुलिस पदाधिकारियों की माने तो हाल के दिनों में नक्सलियों के इनाम और सरेंडर की राशि में बढ़ोत्तरी और दूसरी ओर नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई ने इस ऑपरेशन नई दिशा को एक अचूक हथियार में बदल दिया है. इससे बगैर रक्तपात राज्य स्थापना से अबतक लगभग 200 नक्सली हथियार छोड़ समाज की मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं.
इस हथियार को और कारगर बनाने को लेकर पुलिस मुख्यालय द्वारा सरकार को भेजे गए नई आत्मसमर्पण नीति में कई प्रावधान ऐसे किए गए हैं जो वर्तमान नीति से ज्यादा सुविधाजनक हैं. साथ ही प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की बात भी कही गई है. इससे प्रभावित हो कर बाकी बचे नक्सली आकर्षित होंगे और जंगल का रास्ता छोड़ समाज की मुख्यधारा में शामिल होंगे.
मालूम हो कि हाल के वर्षो में आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित हो कर आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में दो सैक मेम्बर, पांच एरिया कमांडर , सात सब जोनल कमांडर और दर्जनों मारक दस्ता के सदस्य शामिल हैं. आत्मसमर्पण करने वाले की हैसियत और संख्या जहां इस नीति की सफलता की कहानी कह रही है वहीं दूसरी ओर उन दर्जनों महिलाएं, नाबालिग बच्चों की आंखों में नई जिंदगी की उम्मीद की एक रोशनी जगा रही है जिन्हें जबरन संगठन में शामिल किया गया था.
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली -
राज्य स्थापना से 2010 तक ----------- 19 नक्सली
2011 --------------------------------------15 नक्सली
2012 --------------------------------------08 नक्सली
2013 --------------------------------------15 नक्सली
2014 --------------------------------------10 नक्सली
2015 --------------------------------------13 नक्सली
2016 --------------------------------------39 नक्सली
2017 --------------------------------------47 नक्सली
2018 --------------------------------------12 ( अबतक )



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