झारखंड सरकार ने जल संचयन के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है. राज्य में 2 हजार तालाबों का जीर्णोद्धार होना है. इसकी शुरूआत खूंटी से हुई. सीएम रघुवर दास ने किसानों की समस्या के मद्देनजर यह बड़ा निर्णय लागू करवाया है.

झारखंड में बारिश कम नहीं होती है. लेकिन यहां वर्षा जल संचयन की कोई व्यवस्था नहीं है. इसलिए यह जरूरत थी कि यहां के जलाशय या अन्य जल कुंड के अस्तित्व को बचाते हुए उनकी उपयोगिता बढ़ाई जाए. इस मद्देनजर सीएम रघुवर दास ने जल संचयन पखवाड़े की शुरूआत खूंटी में की. उग्रवाद प्रभावित खूंटी जिले के मेराल में सोना तालाब का सीएम रघुवर दास ने जीर्णोद्धार के साथ इस अभियान का शुभारंभ किया.

24 मई से 7 जून तक यह अभियान चलेगा. इसके तहत सूबे के 2000 तालाबों का जीर्णोद्धार होना है. इनमें से 1 हजार निजी तालाब हैं. मेराल में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि जल का संचयन एक मिशन बनना चाहिए.

झारखंड में औसतन प्रत्येक साल 1400 मिली मीटर बारिश होती है. यहां 38 लाख हेक्टेयर भूमि क्षेत्र कृषि योग्य है. लेकिन मात्र 18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है. सिंचाई की सुविधा मात्र 13 फीसदी भूमि में उपलब्ध है. सीएम रघुवर दास ने सिंचाई के क्षेत्र में राज्य बनने से पहले और बाद में उपेक्षा पर अफसोस जताया. सीएम ने कहा कि सिंचाई के कम पानी खर्च वाली टेक्नोलाजी को अपनाने के लिए ड्रिप इरिगेशन



सिस्टम अपनाना होगा. इसके लिए सरकार प्रत्येक जिले से 5-5 किसानों को इजरायल भेजेगी.

पूरे राज्य में फिलहाल 1400 तालाब चिह्नित किए गए हैं. इनके जीर्णोद्धार का काम शुरू हो गया है. इस कार्यक्रम को ग्रामीण विकास विभाग और कृषि विभाग के सहयोग से चलाया जा रहा है. सरकार की कोशिश है कि इस बार की बारिश में पानी का संचयन हो. इस कार्यक्रम के लाभ के संबंध में कृषि मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री ने भी बताया.
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