झारखंड में लाख कोशिशों के बावजूद सरकारी बाबू सुधर नहीं रहे. रांची स्थित जनसंवाद केन्द्र में आयोजित साप्ताहिक समीक्षा कार्यक्रम में एक बार फिर अधिकारियों की लापरवाही सामने आई.
एेसे अधिकारियों को सीएम के प्रधान सचिव सुनील वर्णवाल ने जमकर फटकार लगाई.
मंगलवार को सीएम के प्रधान सचिव सुनील वर्णवाल जिला स्तर पर लंबित शिकायतों की समीक्षा कर रहे थे. इस दौरान सामने ये आया कि अधिकांश जिले आम लोगों की शिकायतें दूर करने में फिसड्डी साबित हो रहे हैं. जब सुनील वर्णवाल ने इसकी वजह पूछा तो अधिकारी सीधा जवाब देने की बजाय टालमटोल करते दिखे. सरकारी बाबूओं के इस रवैये से नाराज प्रधान सचिव ने उन्हें ना केवल सख्त निर्देश दिया, बल्कि 15 दिन के अंदर शिकायतों की संख्या पांच सौ से नीचे लाने का भी आदेश दिया.
जिलावार शिकायतों पर नजर दौड़ाएं तो पलामू -1880, रांची-1448, हजारीबाग-1146, गढवा-1012, चतरा-1346, धनबाद-1492,गिरीडीह-480 शिकायतें कई महीनों से लंबित हैं. वहीं विभाग के स्तर पर सबसे ज्यादा उर्जा विभाग में 1079 शिकायतें हैं. मंगलवार को सूचीबद्ध 16 शिकायतों में कुछ ऐसे भी मामले सामने आये जिसमें मुख्यमंत्री के निर्देश का भी पालन नहीं हुआ था.
अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह कि धनबाद उपायुक्त कार्यालय में पदस्थापित रहे उदय कुमार सिंह की कैंसर पीड़िता पत्नी सरकारी सहायता के अभाव में दम तोड़ दी. जबकि सीएम ने उन्हें सहायता राशि देने का आदेश दिया था. इसी तरह देवघर के एक शिक्षक को नौ महीने से वेतन नहीं मिलने के लिए जिम्मेवार तत्कालीन डीईओ पर कारवाई करने का आदेश प्रधान सचिव ने दिया.
यह पहला मौका नहीं है कि मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में अधिकारियों को फटकार लगी है. मगर फटकार के बावजूद सूबे के अधिकारी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. उधर जनता परेशानी को सहने पर मजबूर है.



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