भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के खिलाफ संयुक्त विपक्ष ने राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है. सोमवार को नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन के आवास पर संयुक्त विपक्ष और सामाजिक संगठनों की चार घंटे से ज्यादा बैठक हुई. इसमें 19 जून यानी मंगलवार से चरणबद्ध आंदोलन करने का फैसला लिया गया.
19 जून से आंदोलन, 5 जुलाई को बंद
हेमंत सोरेन के आवास पर बुलाई गई बैठक में जेएमएम के अलावा कांग्रेस, जेवीएम, आरजेडी, लोकतांत्रिक जनता दल, वाममोर्चा के साथ- साथ आदिवासी-मूलवासी सामाजिक संगठनों ने शिरकत की. बैठक में रघुवर सरकार की नीतियों के खिलाफ विपक्षी दलों की को-ऑर्डिनेशन कमिटी बनाने की भी घोषणा की गई. इस कमिटी के अध्यक्ष हेमंत सोरेन होंगे. बैठक में ये फैसला लिया गया कि 19 जून को राज्यभर में सरकार का पुतला फूंका जाएगा. 5 जुलाई को 24 घंटे का झारखंड बंद बुलाया जाएगा. प्रखंड से लेकर राजभवन तक संयुक्त विपक्ष बिल को लेकर विरोध जताएगा. विपक्ष ने इस संशोधन विधेयक को आदिवासी-मूलवासी और झारखंड विरोधी बताया.
सरकार पर पूंजीपतियों के लिए काम करने का आरोप
बैठक में शामिल हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रघुवर सरकार पर भूमि अधिग्रहण कानून- 2013 में जनहित के प्रावधानों को नजरअंदाज कर पूंजीपतियों के हितों में काम करने का आरोप लगाया. वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि सरकार जब सरकारी संस्थाओं को निजी हाथों में दे रही है, तो क्या गारंटी है कि संशोधन विधेयक के बाद सरकार पहले सार्वजनिक हित के लिए जमीन अधिग्रहण कर निजी-बड़े पूंजीपतियों को न दे दे.
कांग्रेस ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
झारखंड कांग्रेस का एक प्रतिनिधि मंडल प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार के नेतृत्व में
राज्यपाल से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक,
गोड्डा मॉव लिंचिंग, भूख से मौत, साम्प्रदायिक तनाव समेत कई मुद्दों को लेकर राज्यपाल से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया गया.
बिल के खिलाफ बंद
भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर झारखंड दिशोम पार्टी और आदिवासी सेंगल अभियान ने सोमवार को बंद बुलाया था. इसका सूबेभर में मिला-जुला असर रहा. रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर आदिवासी छात्रों ने गिरफ्तारी दी, तो जमशेदपुर में सेंगल अभियान के सदस्यों ने प्रदर्शन किया.
भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल-2017 को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी
बता दें कि भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल- 2017 को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है. इससे संबंधित पत्र राजभवन को भेज दिया गया है. राज्यपाल अब इसे राज्य सरकार को भेजेंगी. इसके बाद राज्य विधि विभाग कानून बनाए जाने की अधिसूचना जारी करेगा. उसी दिन से बिल सूबे में प्रभावी हो जाएगा. विधानसभा ने 12 अगस्त 2017 को यह बिल पारित हुआ था. इसके बाद राष्ट्रपति के मुहर के लिए भेजा गया था.



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