बरकाकाना रांची रेल लाइन निर्माण के हेहल पहाड़ में सुरंग बनाने वाली यूनिकॉर्न कंपनी के बेस कैंप में नक्सली हमला को लेकर पुलिस ने चार युवकों को हिरासत में ले रखा है. लेकिन बरकाकाना ओपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर महिलाएं सवाल उठा रही हैं. महिलाओं ने पुलिस पर हिरासत में लिए गए युवकों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है. महिलाओं का आरोप है कि पूछताछ के नाम पर युवकों को मारने पीटने के अलावा करंट भी लगाया जा रहा है. पुलिस द्वारा खुद ही कानून तोड़ने का काम किया जा रहा है. इसी के विरोध में गांव के गरीब आदिवासी युवकों के साथ हो रहे शोषण के खिलाफ महिलाओं ने थाने का घेरावकिया.
मालूम हो कि गत 26 मई को हेहल रेलवे साइट में मावोवादियों द्वारा रेलवे में लगे Unicorn कंपनी के डीसी जनरेटर, कंप्रेसर मशीन को आग के हवाले कर दिया गया था. साथ ही हाइवा गाड़ी को तोड़ा फोड़ा
गया था. इस पूरे मामले में बरकाकाना पुलिस ने 4 लोगों को हिरासत में ले रखा है और पिछले 7 दिनों से लगातार पूछताछ के नाम पर उन्हें प्रताड़ित कर रही है.
पतरातू में सात दिनों से पुलिस हिरासत में संजीव बेदिया ने कहा कि पुलिस उसे घर से उठा थाने ले आई और कहा कि पूछताछ के बाद छोड़ देंगे. मगर पुलिस केवल प्रताड़ित कर रही है. वहीं हिरासत में लिए गए
एक अन्य युवक नरेश बेदिया ने कहा कि पूछताछ के नाम पर पुलिस सात दिनों से ज्यादती कर रही है. जिस चीज के बारे में हमें कुछ मालूम नहीं उस बारे में पुलिस मुझसे जानना चाहती है. पुलिस हम सभी को
प्रताड़ित कर रही है.
ग्रामीण महिलाओं ने बरकाकाना थाने का घेराव के दौरन साफ कहा कि पुलिस उनके बच्चों को परेशान कर रही है. महिलाओं ने कहा कि अगर उनके बच्चे अपराधी हैं तो उन्हें जेल भेज देना चाहिए. महिलाओं ने
जानना चाहा कि ऐसा कौन सा कानून है जिसके तहत किसी को सात दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है. थाने का घेराव कर रही एक महिला एस देवी ने कहा कि या तो बच्चों को जेल भेज दिया जाए या
फिर उन्हें छोड़ दिया जाए.



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