झाविमो के सिंबल पर चुनाव जीतकर भाजपा में शामिल होने वाले छह विधायकों के दलबदल के पीछे करोड़ों के खेल का आरोप लगाने वाले झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन कर न सिर्फ अपने स्टैंड पर कायम रहने की घोषणा की बल्कि भाजपा को पूरे मामले की सीबीआई जांच, लेन-देन की जानकारी वाले पत्र की हैंडराइटिंग की विशेषज्ञों से जांच तथा भाजपा सांसद एवं तत्कालीन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राय के सिग्नेचर की जांच की चुनौती दे डाली.
झाविमो नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि उन्हें धमकी देने की जगह भाजपा और सरकार पूरे मामले की सीबीआई जांच कराएं. भाजपा नेताओं द्वारा मानहानि का केस करने की धमकी पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वह किसी धमकी से नहीं डरते और कोर्ट में जाकर भी यही कहेंगे कि पूरे मामले की सीबीआई जांच कराएं.
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह महज संयोग नहीं हो सकता कि झाविमो से भाजपा में शामिल छह विधायकों में से पांच को मलाइदार पद मिल जाए और एक पार्टी संगठन में ऊंचा पद पा जाये. यह दिखाता है कि पद और पैसे का लालच देकर संविधान को धत्ता बताकर भाजपा ने दल बदल कराया है और वह अपनी बात पर कायम हैं.
बता दे कि भाजपा की ओर से दल बदल के लिए करोड़ों के लेन-देन की पत्र की छाया प्रति लेकर शुक्रवार को बाबूलाल मरांडी राज्यपाल से मिले और उस पत्र के आधार पर कार्यवाही की मांग की थी. बाबूलाल ने जो पत्र मीडिया को दिया, इस पत्र में तमाम दल-बदल करने वाले विधायकों को दो-दो करोड़ रुपये की धनराशि देने का जिक्र है.
वहीं प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सह कोडरमा सांसद डॉ रवींद्र राय ने झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी की ओर से शुक्रवार को जारी किये गये उस पत्र को फर्जी बताया था, जिसमें दल-बदल को लेकर छह विधायकों को करोड़ों रुपये देने का आरोप लगाया गया है. डॉ रवींद्र राय ने कहा कि पैड व हस्ताक्षर दोनों नकली हैं. इसमें उनका हस्ताक्षर नहीं है.



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