हिरणपुर- एक तरफ जहाँ सरकार हर संभव कोशिश करती है ,तथा लाखो करोड़ो के खर्च करती है ,जिससे कि बच्चो की उचित व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ ,पोष्टिक आहार भी प्राप्त हो सके ,लेकिन भ्रष्ट्राचारियों को इससे कोई फर्क नही पड़ता, उन्हें तो बच्चो के पेट मे लात मार कर सिर्फ पैसे कमाने होते है ।
राज्य भर में कुल 38,432 आंगनबाड़ी केंद्र है,जिसमे 125 केंद्र प्रखंड में है ,तथा प्रखंड के 6418 बच्चो को पूरक पोषाहार के रूप में सप्ताह में तीन दिन सोमवार ,बुधवार व शुक्रवार को अंडा देना तय किया गया है ,लेकिन पहले महीने में ही इसमें गड़बड़ी शुरू कर दी गयी ,कई आंगनबाड़ी केंद्रों में तो पहले यह बोला जाता था ,कि जून के अन्तिम व जुलाई के पहले सप्ताह में अण्डा नही पहुँचा ,साथ ही कुछ ने इस बात की भी शिकायत की ,कि अण्डा सड़ा प्राप्त होता है ,लेकिन वास्तविकता आखिर क्या है ,इसका किसी को कोई खबर नही ।
जायजा लेने पर हुआ खुलासा :-प्रखंड के बिभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लेने पर पता चला कि कई ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र है ,जो कि कभी खुलते ही नही है ,कुछ आंगनबाड़ी केंद्र खुलते तो है ,लेकिन लचरता के कारण अभिभावक के द्वारा अपने बच्चो को नही भेजा जाता है ।
प्रखंड के सुंदरपुर ,हिरणपुर ,बरमसिया ,हाथकाठी ,जबरदाहा ,डांगापाड़ा आदि के आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लेने पर वास्तविकता का खुलासा हुआ कि सरकार की पोषाहार कार्यक्रम का कितनी हद तक सही ढंग से पालन किया जा रहा है , सेविकाओं के द्वारा यह बोला गया कि जून के अन्तिम तथा जुलाई के प्रथम सप्ताह में अण्डा की आपूर्ति कुछ केंद्रों में नही ,तो कुछ केंद्रों में अनियमित रूप से की गई
वितरक की मनमानी ,नही की जाती है मोनिटरिंग :- रिपोर्ट के मुताबिक आपूर्ति कंपनी को पूरे राज्य में आंगनबाड़ी में निबंधित सवा 9 लाख बच्चो के लिए हर सप्ताह 28 लाख अंडा उपलब्ध कराना है ,जिसके लिए पाकुड़ एवं साहेबगंज जिला के लिए कंपनी द्वारा हिरणपुर निवासी विजय भगत को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है ,लेकिन वितरक की मनमानी समझे या आला अधिकारियों से मिलीभगत , न ही अंडा बच्चो तक पहुचता है ,और न ही कोई भी विभागीय करवाई की जाती है ,साथ ही वितरित अंडो को बच्चो को दिया जा रहा है की नही इसकी मॉनिटरिंग भी नही की जाती है ,एक रिपोर्ट के मुताबिक कई आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ कागजी रूप से संचालित है ,वास्तविकता देखने मे पर चलता है कि ऐंसा कोई भी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है ही नही ,लेकिन उनके नाम से सारा कुछ उपलब्ध कराया जा रहा है । प्रत्येक सप्ताह पूरे राज्य में ,1करोड़ 40 लाख रुपये अंडे को ले सरकार द्वारा खर्च किये जाते है ,राज्य गठन के बाद से अब तक केंद्र प्रायोजित पूरक पोषाहार कार्यक्रम पर करीब 4000 करोड़ रुपये खर्च हो चुके है ,इसके बावजूद राज्य में कुपोषण बरकरार है ,इससे आंगनबाड़ी केंद्रो ,उनकी कार्य प्रणाली, सेविका व सहायिका की कार्यशैली ,सिडीपीओ,जिला समाज कल्याण पदाधिकारी तथा निदेशालय व विभाग के मोनिटरिंग सिस्टम पर भी सवाल खड़े होते है ।
:- कुपोषित झारखंड में पोषाहार कार्यक्रम बेहाल ।।
:-सूत्रों की माने तो कई सेविका के द्वारा खुले बाजार में अंडो को बेच दिया जाता है ।।
:- रैपिड सर्वे ऑफ चिल्ड्रन की रिपोर्ट की माने तो 42 लाख बच्चे है 5 वर्ष तक के जिसमे से 20 लाख बच्चे कुपोषित ।।
:-सीडीपीओ के अनुसार,निरीक्षण किया जाता है,गड़बड़ी पाए जाने पर करवाई की जाएगी।।


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