बीते 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान रांची में हुई पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ गुरुवार को विभिन्न संगठनों ने राजभवन मार्च किया. मोरहाबादी मैदान से निकला यह मार्च राजभवन के पास जाकर एक सभा में तब्दील हो गया. मार्च को विभिन्न सामाजिक- राजनीतिक संगठनों का समर्थन मिला. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और कांग्रेस नेता सुबोधकांत सहाय भी इसमें शरीक हुए.

नेताओं ने सभा को सम्बोधित करते हुए एसटी-एससी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बहाने केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा. बाद में 33 लोगों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा. इसमें भारत बंद के दौरान छात्र-छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई करने वाले एसडीओ और सिटी एसपी को बर्खास्त करने और इस कार्रवाई में घायल हुए छात्रों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की गयी.

राज्यपाल से मुलाकात कर बाहर आने के बाद नेताओं ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की घोषणा करते हुए 27 मई को रांची में आदिवासियों- दलितों की एक बड़ी रैली करने का एलान किया. प्रतिनिधिमंडल में शामिल छात्राओं ने उम्मीद जतायी कि उन्हें अब न्याय मिलेगी क्योंकि राज्यपाल ने इस मुद्दे पर उन्हें अलग से आवेदन के साथ बुलाया है.

गौरतलब है कि एससी-एसटी एक्ट को लेकर 2 अप्रैल को हुए भारत बंद के दौरान रांची पुलिस और आदिवासी छात्र-छात्राओं में झड़प हो गई थी. पुलिस पर पत्थर फेंके गये थे, जवाब में पुलिस ने लाठी और आंसू गैस के गोले का सहारा लिया था. इस झड़प में दोनों तरफ से लोग घायल हुए थे.

उसी झड़प के विरोध में राजभवन मार्च का आयोजन किया गया,  जिसमें बाबूलाल मरांडी, सुबोधकांत सहाय, बंधू तिर्की, रामेश्वर उरांव, गीताश्री उरांव समेत कई दलों के नेताओं ने शिरकत की.
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