पांचवी अनुसूची संविधान का एक अंग भर है. यह संविधान से ऊपर नहीं है. पत्थलगड़ी की आड़ में भोले भाले आदिवासियों को बरगलाया जा रहा है और संविधान की तरफ से आदिवासी समाज को मिले विशेषाधिकार की गलत व्याख्या की जा रही है. पत्थलगड़ी तो आदिवासियों की एक परंपरा है जिसके तहत वे अपनी ज़मीन का सीमांकन करते हैं. पत्थलगड़ी में संविधान से मिले अधिकारों के बारे में तो लिखा जा सकता है, लेकिन उसकी आड़ लेकर बाहरी का प्रवेश वर्जित जैसी गतिविधियां पूरी तरह असंवैधानिक है. ये कहना है झापीपा (झारखंड पीपुल्स पार्टी) के संस्थापक अध्यक्ष सूर्य सिंह बेसरा का. जमशेदपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने ये बात कही.
सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि झारखंड में पत्थलगड़ी झारखंडियों की परंपरा है. जिंदा रहते हुए भी गांव का सीमांकन, मरने के बाद भी पत्थलगड़ी कर जन्म और मृत्यु और क्रिया कर्म के बारे में सारी बातें लिखी जाती हैं. लेकिन पांचवी अनुसूची को संविधान से ऊपर मानना गलत है.
उन्होंने कहा कि ऐसा कहना असंवैधानिक है कि हमने पत्थल गाड़ दिया और इसलिए वह क्षेत्र वर्जित हो गया और अब वहां किसी का भी प्रवेश निषेध हो गया. उन्होंने कहा कि पत्थलगड़ी के संदर्भ में जो लोग भी ऐसा बोलते हैं वो गलत है और ऐसा जो लोग भी कर रहे हैं वे भी गलत हैं. उन्होंने ऐसे लोगों पर खुद का स्वार्थ साधने का आरोप लगाया. सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि ऐसे लोग ही आदिवासियों को गुमराह कर रहे हैं और उन्हें गलत रास्ते पर चलने को कह रहे हैं.



Post A Comment:
0 comments so far,add yours