झारखंड के बच्चे खतरे में हैं. मासूमों को नक्सली उठा कर ले जा रहे हैं. नक्सली उन्हें अपने दस्ते में शामिल कर खूंखार नक्सली बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. ये बातें यूनाइटेड नेशन्स ने अपनी रिपोर्ट में कहीं हैं. रिपोर्ट में झारखंड और छत्तीसगढ़ में मासूम बचपन पर नक्सली साये को लेकर कई बातें कही गईं हैं . यूएन की रिपोर्ट को लेकर जहां बच्चों पर काम कर रहे सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है. वहीं, विपक्षी दल के लोगों ने भी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है.

मालूम हो कि नक्सली वर्षों से बच्चों का इस्तेमाल झारखंड में करते रहे हैं, लेकिन अब ट्रेंड बदल गया है. कल तक बच्चों से कुरियर और पुलिस की सूचनाएं लेने वाले नक्सली अब बच्चों को हथियारों की ट्रेनिंग दे कर उन्हें खूंखार नक्सली बना रहे हैं. यूनाइटेड नेशन्स की वार्षिक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है.

बच्चों के लिए काम करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं की मानें तो इतना ही नहीं गांव की बच्चियों पर भी नक्सलियों की नजर है. वे उन्हें भी उठा कर ले जा रहे हैं और अपने संगठन में शामिल कर रहे हैं. जो बच्चियां संगठन में शामिल नहीं होना चाहती हैं उसका यौन शोषण किया जाता है और फिर मानव तस्करों के हाथों जिस्म के बाजार में बेच दिया जाता है.

विपक्षी दल कांग्रेस के नेता जहां यूएन की इस रिपोर्ट को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं यूएन की रिपोर्ट को लेकर राज्य पुलिस मुख्यालय अनजान नहीं है. राज्य पुलिस के एडीजी अभियान सह प्रवक्ता आरके मल्लिक की मानें तो यूएन की रिपोर्ट में जो बातें कहीं गई हैं वे सही हैं. मगर एडीजी का कहना है कि पिछले दो सालों में पुलिस ने इन इलाकों में बेहतर काम किया है और न सिर्फ बच्चों को नक्सलियों के कब्जे से आजाद कराया है बल्कि बच्चे-बच्चियों को कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय जैसे संस्थानों में दाखिल भी करवाया है ताकि बच्चे-बच्चियां पढ़-लिख कर अपना भविष्य संवार सकें.
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