72वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पूरे देश में आजादी का जश्न मनाया जा रहा है. लेकिन झारखंड के वे स्थान जहां आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई गई, वे आज गुमनामी के अंधेरे में खो गये हैं. सरकारें आईं गईं, लेकिन कभी इनकी ओर ध्यान नहीं गया. ऐसी ही जगहों में से एक है धनबाद के झरिया का भागा स्टेशन. देश के कई क्रांतिकारियों के अलावा यहां नेताजी सुभाष चन्द्र बोस भी आए और नेताजी ने यहीं पर अंग्रेज़ों की आंखों में धूल झोंकी थी. इस जगह का नाम भागा इसलिए पड़ा क्योंकि नेताजी अंग्रेजों को चकमा देकर यहां से भाग निकले थे.
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की स्मृतियां धनबाद झरिया के भागा से भी जुड़ी हुई है. यहां पर उनके जान पहचान के काफी लोग रहते थे बल्कि स्वतंत्रता संग्राम में उनको मदद पहुंचाने वाले मजदूर नेताओं की भी यहां काफी तादाद थी. ट्रेड यूनियन की शुरुआत भी इसी झरिया के भागा क्षेत्र में हुई थी. जिन्होंने कोलयारी क्षेत्रों में अंग्रेज़ों के खिलाफ मज़दूरों की हक की लड़ाई लड़ी थी. अंग्रेज़ों के विरुद्ध यूनियन को संगठित करने का काम नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने ही किया था.
वहीं यूनियन की राजनीति में सबसे पहले आने वाले सत्य विमल सेन गुप्ता के परिवार की तीसरी पीढ़ी आज भी यहां जोड़ापोखर थाना क्षेत्र में मौजूद हैं. उनके पोते पार्थसेन गुप्ता पूरे गर्व से बताते हैं कि कैसे उनके दादा जी ने नेताजी को मदद पहुंचायी और कैसे कोलयरी मजदूरों के लिए अंग्रेज़ों से लड़ाई लड़ी. आज भी उनके पास वो तस्वीर मौजूद है, जिसमें नेता जी उनके घर में आकार ठहरे थे. यह तस्वीर उनके पास में ऐतिहासिक दस्तावेज़ के रूप में मौजूद है.



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