राजधानी रांची की एक संस्था ने राज्य में 2476 पदों पर नियुक्ति के लिए वैकेन्सी निकाली है. संस्था का नाम है झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट. लेकिन ये जानकार हैरानी होगी कि इस संस्था ने अपने विज्ञापन में रांची के जिस पते का जिक्र किया है, घंटों खोजने के बाद उस पते पर ना तो कोई कार्यालय मिला और ना ही कोई स्टाफ नजर आया.

ग्रामीण शिक्षक की 2224 वैकेन्सी, ब्लाक कॉर्डिनेटर की 224, जिला कॉर्डिनेटर की 24, लेखापाल की दो और राज्य कॉर्डिनेटर की दो वैकेन्सी. यानी 2476 पदों पर बेरोजगारों को नौकरी देने का दावा किया है झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट ने. अखबारों में छपे नौकरी के विज्ञापन के लिए आवेदन जमा करने की तिथि बढ़ा दी गयी है. लेकिन जब न्यूज-18 ने इस दावे की हकीकत जानने की कोशिश की तो सबकुछ हवा हवाई निकली. झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट ने अपने विज्ञापन में रांची के इन्द्रपुरी रोड नंबर - 01 का जिक्र किया है. लेकिन इस पत्ते पर झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट का कार्यालय तो दूर एक साइन बोर्ड तक नजर नहीं आया.

जब संवाददाता ने इन्द्रपुरी रोड नंबर-01 में स्थानीय लोगों से संस्था के बारे में जानने की कोशिश की तो जवाब में सबने खुद को अनभिज्ञ बताया. बाद में संवाददाता ने झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट की वेबसाइट को खंगाला तो किसी प्रकार का कोई रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं दिखा. वेबसाइट पर एक मोबाइल नंबर- 8292008962 का जिक्र था. इस नंबर पर फोन करने पर पहली बार हैलो की आवाज आयी, लेकिन उसके बाद लगातार नंबर इंगेज दिखाता रहा. वेबसाइट में झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट के डायरेक्टर के तौर पर एस महतो का नाम अंकित है.

झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट ने तमाम पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदकों से 230 रुपये ऑनलाइन फी की भी मांग की है. इस सिलसिले में  संवाददाता ने वार्ड के पार्षद से संपर्क साधा और उनसे कार्यालय के बारे में जानकारी लेनी चाही, तो वे चौक गये और कहा 15 सालों से पार्षद हूं, लेकिन आजतक अपने क्षेत्र में झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट का एक बोर्ड तक नहीं देखा.

सवाल ये नहीं कि झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट के दावे में कितनी सच्चाई है. सवाल ये है कि जो संस्था दो हजार से ज्यादा ग्रामीण शिक्षक की भर्ती करने जा रही है. उसने अपने आप को कहां छिपा रखा है. साथ ही संस्था द्वारा नियुक्त शिक्षक किसे और किस स्कूल में पढायेंगे. कहीं एेसा तो नहीं कि झारखंड एजुकेशन डेवलपमेंट एक ऐसी दाल पकाने के चक्कर में है, जिससे आगे चलकर बेरोजगारों को धोखा मिलने वाला है.
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