पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड में पांच साल बाद फैसला आया. दुमका कोर्ट ने इस मामले में दो नक्सली सुखलाल मुर्मू उर्फ प्रवीर और सनातन वास्ती उर्फ ताला को दोषी करार दिया, जबकि पांच साक्ष्य के अभाव में बरी हो गये. साल 2013 में इस घटना ने झारखंड के पूरे पुलिस तंत्र को झकझोर कर रख दिया था.
घटना 2 जुलाई 2013 का है. तब के पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार डीआईजी प्रिया दुबे की मीटिंग में शामिल होने दुमका पहुंचे थे. मीटिंग के बाद वे दुमका से पाकुड़ लौट रहे थे. इसी क्रम में दुमका-पाकुड़ मुख्य मार्ग पर काठीकुंड के आमतल्ला गांव के समीप घात लगाए नक्सलियों ने उनकी गाड़ी पर गोलियों की बौछार कर दी थी. इस हमले में एसपी बलिहार समेत चार जवान मौके पर ही शहीद हो गए थे, जबकि एक जवान की मौत अस्पताल ले जाने के क्रम में हुई थी.
इस घटना से सूबे का पुलिस तंत्र हिल गया था. लेकिन ये पहला मौका नहीं था जब सूबे में नक्सलियों ने किसी एसपी को निशाना बनाया था. उससे पहले साल 2000 के अक्टूबर में नक्सलियों ने लोहरदगा के एसपी अजय कुमार सिंह की हत्या कर दी थी. तब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था. लोहरदग्गा के पेशरार गांव में अजय कुमार को गोली मार दी गई थी. 1995 बैच के आईपीएस अजय अपने बेखौफ तेवर के लिए मशहूर थे और वह बिहार के पहले ऐसे आईपीएस अधिकारी थे, जो वर्दी में नक्सलियों से लड़ते हुए शहीद हुए.



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