भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे के पैर धोकर पीने से चर्चा में आए बीजेपी कार्यकर्ता पवन साह गोड्डा के सदर प्रखंड के कनभारा गांव के रहने वाले हैं. वह बीजेपी के साथ-साथ संघ से भी जुड़े हुए हैं. पवन बीजेपी के शुरुआती कार्यकर्ताओं में से एक हैं.
12 वर्ष की उम्र में पिता को खोने के बाद दो छोटी बहनों और मां की परवरिश का जिम्मा पवन पर आ गया. मैट्रिक पास करने के बाद वह बीजेपी से जुड़ गये. वर्ष 2009 में जब सांसद निशिकांत दुबे पहली बार बीजेपी का टिकट लेकर गोड्डा पहुंचे, तो महज दस लोगों ने उनका स्वागत किया. उनमें से एक पवन भी थे.
पवन के मुताबिक, पहली बार देखकर ही उन्हें ऐसा लगा था कि निशिकांत दुबे ही गोड्डा के लिए कुछ कर सकते हैं. वह उस समय निशिकांत दुबे को अपने गांव कनभारा भी लेकर गये थे. करभारा गांव नदी के किनारे बसा हुआ है, जहां के नब्बे प्रतिशत लोग बीजेपी में आस्था रखते हैं. मगर आजादी के इतने दिनों बाद भी इस गांव तक आसानी से पहुंचने के लिए एक पुल नहीं है.
निशिकांत दुबे जब पहली बार गोड्डा का सांसद बने, तो पवन ने अपनी ऊंगली काटकर उन्हें तिलक लगाया था. उसी समय ये भी कहा था कि अगर आप हमारे गांव में पुल बनवा देते हैं, तो पूरे गांव की तरफ से हम आपके पांव पखारेंगे. रविवार को पुल के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान पवन ने अपने उसी वादे को पूरा किया. सांसद के पैर धोकर चरणामृत पी लिया.
गांववाले कहते हैं कि पवन बहुत ही भावुक इंसान हैं. उन्होंने अपनी बीएसएफ की नौकरी इसलिए छोड़ दी क्योंकि बीमार मां ने कहा कि तुम चले जाओगे, तो मेरा और तुम्हारी बहनों का खयाल कौन रखेगा. अपनी मां की इस बात को सुनकर उन्होंने ज्वाइनिंग लेटर फाड़ दिया था. पवन खेती-बाड़ी कर घर चलाते हैं और बीजेपी के समर्पित कार्यकर्ता हैं.



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