गोड्डा के कनभारा में बीजेपी कार्यकर्ता के द्वारा पैर धोकर पीने पर उपजे विवाद को लेकर सांसद निशिकांत दुबे ने सफाई दी है. अपने फेसबुक पेज पर सांसद ने लिखा,' क्या मैं अपने मां- पिताजी को बदल दूं? क्या मैं जाति से ब्राह्मण हूं, इसलिए मेरे साथ मेरे मां -पिताजी गाली के हकदार हैं? किसी ने पीया या नहीं पीया, मैंने अपने शिक्षक बेचू नारायण सिंह, जो जाति से कुरमी थे उनका पांव धोकर पीया है. किसी दिन पवन जैसे कार्यकर्ता का चरणामृत लेने का सौभाग्य मुझे मिलेगा, क्योंकि उन जैसे लोगों के कारण ही मैं जनता के बीच जिन्दा हूँ.'
सांसद ने लिखा कि पिछले 9 साल में मैंने किसी कार्यकर्ताओं को ठेका पट्टा नहीं दिया है. हजारों की भीड़ के सामने जब यह वाकया हुआ, तो मैंने खुद लोगों को बताया. भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुझे बचाने के लिए गोली तक खाई है. मुझे गर्व है कि मैं भाजपा का कार्यकर्ता हूं.
सांसद के मुताबिक अपनों में श्रेष्ठता बांटी नहीं जाती और कार्यकर्ता यदि खुशी का इजहार पैर धोकर कर रहा है, तो क्या गजब हुआ? उन्होंने जनता के सामने कसम खायी थी, इसलिए सम्मान किया. पैर धोना तो झारखंड में अतिथि के लिए होता ही है. इसे राजनीतिक रंग क्यों दिया जा रहा है?



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