जनपद गुमला के रायडीह थाना क्षेत्र के भलमंडा गांव की एक गर्भवती महिला की मौत सिस्टम की लचरता के कारण हो गई.दरअसल बीती सोमवार की रात गर्भवती महिला को सदर अस्पताल के द्वारा रांची रेफर किया गया लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब होने के कारण वह लोग उसे रांची नहीं ले जा सके और रात को वापस घर लेकर चले गए.मंगलवार की सुबह में गर्भवती सीता की मौत हो गई जिसके बाद जहां गांव में पूरा मातम का माहौल है.

सीता की मौत पर ग्रामीणों ने सरकार के उन तमाम स्वास्थ्य योजनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं जिनके नाम पर करोड़ खर्च कर सरकार गरीबों को लाभ देने की बात कहते नहीं थकती है.वहीं मृतक सीता की गर्भवती होने के बाद से उसकी पूरी स्वास्थ्य जांच करवाने वाली सहायिका अंजु तिरकी की मानें तो शुरु से ही सीता का सभी कुछ सही चल रहा था.रविवार को अचानक उसे दिक्कत होने के कारण सदर अस्पताल में भर्ती कराया,जहां उसकी जांच में सभी रिपोर्ट सही था लेकिन अचानक चिकित्सकों ने उसे रांची रिम्स रेफर कर दिया.

दूसरी ओर गर्भवती महिला की मौत मामले में सिविल सर्जन डॉक्टर सुखदेव भगत ने बताया की महिला को 24 सितम्बर को स्थिति खराब होने के कारणरांची रिम्स रेफर किया गया था.उसके लिए एम्बुलेंस भी दी जा रही थी लेकिन परिवार वाले राशन कार्ड व अन्य सामान लाने की बात कह कर अपने घर वापस चले गए और
सुबह में उसकी मौत की सूचना मिली. सिविल सर्जन ने अस्पताल की ओर से कोई लापरवाही से साफ इंकार किया है.

विदित हो कि दो दिन पूर्व ही झारखंड की राजधानी रांची में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थय योजना आयुष्मान भारत लांच कर दावा किया था की अब कोई गरीब इलाज के आभाव में नहीं मरेगा.उसी मंच पर मौजूद सूबे के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने भी इस योजना को झारखंड के लिए काफी महत्वपूर्ण बताया था साथ ही योजना आरंभ होने के साथ ही इसके लाभ मिलने के दावे शुरु हो गए थे लेकिन शायद गुमला तक पीएम व सीएम की घोषणा नहीं पहुंच पाई.

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