अदाणी फाउंडेशन द्वारा संचालित सुपोषण कार्यक्रम के तहत अब तक अलग-अलग 12 गांवों के 297 बच्चों को सुपोषित किया जा चुका है। ये वो 297 बच्चे हैं जिन्हें जून 2017 से लेकर अगस्त 2017 के बीच गोड्डा के कई गांव नयाबाद, पेटवी, पेटवी संताली, बसंतपुर, सोन्डीहा, मोतिया, बक्सरा, मलियाकित्ता आदि में कुपोषित बच्चों के तौर पर चिन्हित किया गया था। इन बच्चों को युनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रमाणित एमयुएसी नामक मेटरमेंट टेप की मदद से चिन्हित किया जाता है। अदाणी फाउंडेशन के सुपोषण कार्यक्रम से जुड़ी संगिनी बहनों ने अलग-अलग गांवों में जाकर इन बच्चों को चिन्हित करने का काम किया। कुल 297 बच्चे चिन्हित किए गए जिसमें 100 बच्चे तो अत्यंत किपोषित अवस्था में पाए गए, जबकि 197 बच्चे मध्यम कुपोषित बच्चों की श्रेणी में थे।

डॉक्टरी जांच के बाद पाए गए आंकड़े जाहिर करते हैं कि सुपोषण कार्यक्रम के तहत चिन्हित ये 297 बच्चे अब सुपोषित की श्रेणी में आ चुके हैं। जाहिर है अदाणी फाउंडेशन की संगिनी बहनों की तकरीबन एक साल की कड़ी मेहनत रंग लाई है। सुपोषण कार्यक्रम के तरह संगिनि बहनें उन तमाम परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रहती हैं जिनके बच्चे कुपोषण की अवस्था में पाए गए थे। जरूरत के मुताबिक फाउंजेशन की तरफ से उन बच्चों के खान-पान का तो ख्याल रखा ही जाता है समय समय उन बच्चों का डॉक्टरी जॉच भी कराया जाता है। संगिनी बहने घुम-घुम कर घरों में साफ-शफाई रखने का संदेश भी देती हैं क्योंकि बच्चे अक्सर गंदगी की वजह से ज्यादा बीमार पड़ते हैं। संगिनी बहने उन मांओं का भी ख्याल रखती हैं जिनके बच्चे मां की दूध पीते हैं। उन मांओं के खान-पान का खास ध्यान रखना भी इस कार्यक्रम का हिस्सा है। इसके अलावा अदाणी फाउंडेशन गांवों में सुपोषण वाटिका लगाकर भी गांव की औरतों को उनके खान-पान का खास ध्यान रखती है। सुपोषण कार्यक्रम से जुड़ कर संगिनी बहन के तौर पर काम कर रही पेटवी निवासी अन्नु कुमारी बताती है कि जब से अदाणी फाउंडेशन का सुपोषण शुरू हुआ है गोड्डा के इन चिन्ह्त गांवों जन्म लेने वाले बच्चों में कुपोषण की समस्या देखने को बहुत कम मिल रही है, अन्नु के मुताबिक इसकी बड़ी वजह गर्भवती महिलाओं को मिलने वाला दिशानिर्देश और उचित समय पर उचित इलाज मिलना भी है।
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