स्थायीकरण की एक सूत्री मांग को लेकर आंदोलन पर चल रहे सूबे के 67 हजार पारा शिक्षक दुमका में अपने एक साथी की मौत पर आक्रोशित हैं. अधिकतर पारा शिक्षकों पर अब प्रशासन की सख्त निगरानी है. लिहाजा पारा शिक्षक अब मोबाइल फोन से अपने आंदोलन को संचालित कर रहे हैं. इधर झामुमो ने पारा शिक्षक की मौत के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है.
पहले रामगढ़ और अब दुमका में हुई एक पारा शिक्षक की मौत के बाद सूबे के 67 हजार पारा शिक्षकों में आक्रोश है. सूबे के पारा शिक्षकों ने स्थायीकरण के मुद्दे पर चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत की थी. पहले चरण में पारा शिक्षकों ने राज्य के सभी स्कूलों में काला बिल्ला लगाकर पठन पाठन किया था. लेकिन उनकी मांगों पर कोई विचार नहीं हुआ. बाद में पारा शिक्षकों ने 29 अक्टूबर से लेकर दो नवंबर तक राजभवन के पास धरना दिया. फिर 15 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के मौके पर मोरहाबादी में हंगामा किया. फिर लाठीचार्ज से नाराज होकर 16 नवंबर से हड़ताल पर चले गए.
इधर दुमका में हुई एक पारा शिक्षक की मौत पर एक बार फिर पारा शिक्षक आक्रोश में हैं और सोमवार यानी 17 दिसंबर से सभी विधायकों के आवास के सामने धरना देने की योजना बनाई है.
पारा शिक्षकों के मुद्दे पर भाजपा ने एक बार फिर अपनी सरकार का बचाव किया है. भाजपा नेता और भाजपा पंचायती राज प्रकोष्ठ के संयोजक सुमन सिंह ने कहा है कि पारा शिक्षकों को अपनी सोच व्यवहारिक बनानी चाहिए. उन्होंने कहा कि भाजपा ने पारा शिक्षकों को जितना दिया है, उससे ज्यादा किसी सरकार ने नहीं दिया है. इधर सूबे के मुख्य विपक्षी पार्टी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है. झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने कहा है कि सूबे की सरकार रोजाना लोगों को रोजगार देने की बात करती है. लेकिन जो पहले से रोजगार में है वे मौत के मुंह में समा रहे हैं.



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