चाइल्ड ट्रैफिकिंग के शिकार 20 लड़के- लडकियों को दिल्ली से आजाद कराकर रांची लाया गया. ये लोग दलालों के बहकावे में आकर दिल्ली चले गये थे. वहां कई वर्षों तक इनका हर तरह का शोषण हुआ. दिल्ली सीडब्ल्यूसी के प्रयास से इन्हें रांची लाया गया. हालांकि 17 बच्चियां अब भी दिल्ली सीडब्ल्यूसी के पास हैं.
न्यूज- 18 से खास बातचीत में एक बच्ची ने बताया कि दिल्ली में घरेलू कामकाज कराने के अलावा एजेंट के द्वारा उसका शारीरिक शोषण भी किया जाता था. मारपीट भी होती थी. 16 लड़की और 4 लड़कों में 18 नाबालिग हैं. इनमें से 14 को प्रेमाश्रय में रखा गया है. वहीं चार को बालश्रय और दो को नारी निकेतन भेजा गया है.
इन जिलों के हैं बच्चे- बच्चियां
गुमला-07
प.सिहभूम-02
रांची-02
पलामू-01
पाकुड़-01
चाईबासा-01
धनबाद-01
गिरीडीह -01
बोकारो-01
खूंटी-01
कोडरमा-01
और लोहरदगा -01
17 बच्चियां अब भी दिल्ली में
इनके अलावा 17 बच्चियां दिल्ली सीड्ब्यूसी के पास हैं. कागजी अड़ंगा के कारण उन बच्चियों की घर वापसी नहीं हो पाई. झारखंड कल्याण विभाग के बाल संरक्षण संस्था के निदेशक डीके सक्सेना ने नाराजगी जताते हुए कहा कि दिल्ली सीड्ब्ल्यूसी से बात करके जल्द ही उन्हें भी रांची लाया जाएगा. जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने रेस्क्यू कराये गये लड़के- लड़कियों के लिए सभी प्रकार की सहायता मुहैया कराने की घोषणा की है.



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