झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योेगेन्द्र प्रताप ने कहा है कि दलबदलू विधायकों के मामले में जो फैसला आया है, वह लोकतंत्र व न्याय का गला घोंटने वाला है। झारखंड के इतिहास व भविष्य में लोकतंत्र के लिए इससे काला दिन और कोई हो ही नहीं सकता है। पहले तो सरेआम पद और पैसे का लालच देकर झाविमो के बैनर तले जीते पार्टी के छह विधायकों को दलबदल के तहत भाजपा में शामिल करा लिया गया और फिर लगभग चार वर्ष तक लंबी सुनवाई के बाद आज अंततः जिस प्रकार दिल्ली में बैठे भाजपा नेताओं के दबाव में न्याय का गला घोंटवा दिया गया, वह झारखंड ही नहीं बल्कि यह पूरे देश के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हो गया कि सत्ता की लोभी भाजपा ने संविधान की कैसे धज्जियां उड़ाई है। भाजपा सभी संवैधानिक संस्थाओं को रिमोट से चला रही है। 2015 के मार्च में प्रारंभ इस मामले में भाजपा की ओर से 78 गवाहों में से 57 गवाही, झाविमो की ओर से आठ गवाही हुई। वहीं सुनवाई की मुकर्रर 97 तिथियों में से 64 तिथियों में 12 दिसम्बर, 2018 को हुई अंतिम सुनवाई के बाद भी भाजपा सरकार में कुछ ऐसे ही न्याय की उम्मीद थी। फैसले से झाविमो ही नहीं राज्य की तमाम जनता आहत है। दुनियां के सबसे मजबूत लोकतंत्र वाले इस देश में ही लोकतंत्र का ऐसा हश्र होे, यह भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। अब गंभीर सवाल देश के राजनीति में प्रारंभ गलत परंपरा की शुरूआत व राजनीतिक साख और नैतिकता पर भी आ खड़ी है। साथ ही इससे कहीं-न-कहीं स्पीकर कोर्ट की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। वहीं राजनीतिक सुचिता का राग अलापने वाली भाजपा का चेहरा इससे पूरी तरह बेनकाब हुआ है। राज्य की जनता पूरे गौर से भाजपा के इस कुकृत्य को देख रही है, समय पर इसका जवाब देगी। भाजपा चाहे जितना जोर लगा ले परंतु इतना तय है कि ये सभी छह विधायक दुबारा विधानसभा की दहलीज लांघ नहीं पायेंगे। हमारी पार्टी विचार-विमर्श कर आगे की रणनीति तय करेगी।
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